
गंगा बंदी के दौरान हरिद्वार में गंगा घाटों और नदी के किनारों की सफाई के लिए चलाए गए अभियान में करीब आठ टन कचरा हटाया गया। इसके बावजूद कई स्थानों पर गंदगी बिखरी नजर आ रही है, जिससे सफाई व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। गंगा का जलस्तर कम होने के कारण नदी के किनारों पर जमा प्लास्टिक, पुराने कपड़े, पूजा सामग्री और अन्य अपशिष्ट साफ दिखाई दे रहे हैं।
गंगा बंदी के दौरान हरकी पैड़ी समेत विभिन्न घाटों पर सफाई अभियान चलाया गया। नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से नदी किनारे जमा कचरे को एकत्र कर हटाने का प्रयास किया गया। अभियान के तहत बड़ी मात्रा में कचरा बाहर निकाला गया, लेकिन कई स्थानों पर अब भी गंदगी नजर आने से सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है।
जलस्तर घटते ही उजागर हुई गंदगी
गंगा में पानी कम होने के कारण नदी के किनारों पर जमा कचरा सामने आ गया है। कई जगह प्लास्टिक की थैलियां, कपड़े और पूजा सामग्री बिखरी दिखाई दे रही है। इससे गंगा की स्वच्छता और घाटों के रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सफाई अभियान के बावजूद नदी किनारे गंदगी का नजर आना यह दर्शाता है कि कचरा हटाने के साथ उसके उचित निस्तारण और नियमित निगरानी पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
सिर्फ अभियान से नहीं होगा गंगा का कायाकल्प
गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए विशेष सफाई अभियान के साथ नियमित सफाई व्यवस्था भी जरूरी है। घाटों पर पर्याप्त कूड़ेदान लगाने, कचरे का सही निस्तारण करने और श्रद्धालुओं को जागरूक करने की आवश्यकता है। साथ ही, नदी में प्लास्टिक और पूजा सामग्री डालने पर रोक लगाने के लिए प्रभावी निगरानी भी जरूरी है।
हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों की स्वच्छता न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि शहर की छवि और गंगा संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
करीब आठ टन कचरा हटाया जाना सफाई अभियान की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन नदी किनारे अब भी दिखाई दे रही गंदगी बताती है कि गंगा को स्वच्छ रखने के लिए निरंतर प्रयास, बेहतर कचरा प्रबंधन और जनभागीदारी बेहद जरूरी है।













