
बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत तो लेकर आता है, लेकिन इसी के साथ कई स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में खानपान को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी बीमारियों की वजह बन सकती है। खासतौर पर बाजार में खुले में बिकने वाले कटे हुए फल मानसून के दौरान आपकी सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में कटे हुए फलों का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनप सकते हैं।
कटे हुए फल क्यों बन सकते हैं खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी फल का छिलका उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत का काम करता है। जब फल काटा जाता है तो उसका अंदरूनी हिस्सा सीधे हवा, धूल, नमी, हाथों और विभिन्न उपकरणों के संपर्क में आ जाता है। यदि साफ-सफाई का पूरा ध्यान न रखा जाए तो हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ने लगते हैं, जो फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी कई समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोखिम?
बरसात के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होती है और तापमान भी ऐसा रहता है जो बैक्टीरिया की वृद्धि के लिए अनुकूल माना जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान बैक्टीरिया को तेजी से पनपने में मदद करता है। इसके अलावा बारिश के दौरान धूल, गंदगी, कीड़े-मकोड़े और मच्छरों की संख्या भी बढ़ जाती है। खुले में रखे कटे हुए फल इन सभी के संपर्क में आकर जल्दी दूषित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमरे के सामान्य तापमान पर रखे कटे हुए फलों में कुछ ही घंटों के भीतर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय तक खुले में रखे गए फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। विशेष रूप से सड़क किनारे या खुले स्थानों पर बिकने वाले कटे हुए फलों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
कब सुरक्षित माने जाते हैं कटे हुए फल?
विशेषज्ञों के अनुसार कटे हुए फल तभी अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जा सकते हैं जब उन्हें पूरी स्वच्छता के साथ तैयार किया गया हो। इसके लिए जरूरी है कि फल साफ पानी से धोए गए हों, काटने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण साफ और सैनिटाइज्ड हों तथा फल को उचित तापमान पर रखा गया हो। यदि फल को 5 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर स्टोर किया गया है और वह लंबे समय तक खुले में नहीं रखा गया है, तो संक्रमण का खतरा काफी कम हो सकता है।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि कटे हुए फल में चिपचिपापन दिखाई दे, बदबू आने लगे या उसका रंग बदल गया हो, तो उसे बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। ऐसे फल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं और पेट संक्रमण, उल्टी, दस्त जैसी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान यदि फल खाना है तो पूरा और ताजा फल सबसे सुरक्षित विकल्प होता है। घर पर अच्छी तरह धोकर और साफ वातावरण में काटकर खाया गया फल स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक लाभकारी होता है।
स्वास्थ्य के लिए सावधानी है जरूरी
बारिश के मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए बाजार से कटे हुए फल खरीदने से पहले उनकी गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि किसी फल की ताजगी को लेकर जरा भी संदेह हो तो उसे खाने से बचना ही बेहतर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में सुरक्षित खानपान अपनाकर ही फूड इंफेक्शन और मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।













