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Sunday, February 15, 2026
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चारधाम यात्रा 2025 के पंजीकरण 25 लाख के पार, हाईटेक नियमों और सुरक्षा इंतज़ामों के साथ तैयार उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड सरकार ने दावा किया है कि 2025 की यात्रा के लिए अब तक 25 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

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देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र चारधाम यात्रा इस बार और भी व्यवस्थित और सुरक्षित होने जा रही है। उत्तराखंड सरकार ने दावा किया है कि 2025 की यात्रा के लिए अब तक 25 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सरकार ने इस वर्ष यात्रा के संचालन को लेकर कई नई तकनीकों, नियमों और व्यवस्थाओं को लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा संकल्प है कि हर श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर सके, और उसे कोई असुविधा न हो।”
इसके लिए सचिव स्तर के अधिकारियों को चारधाम यात्रा का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्चस्तरीय बैठकों और त्वरित निर्णयों के ज़रिए यात्रा को सहज, सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है।

इस बार लागू किए गए नए नियम

चप्पल या सैंडल पहनकर वाहन चलाने पर रोक – ड्राइवरों को केवल जूते या बूट पहनकर ही वाहन चलाना होगा। नियम उल्लंघन पर धारा 177A के तहत चालान, जुर्माना और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई। दोपहिया वाहनों पर सवार और पीछे बैठने वाले दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य। पंजीकरण, फिटनेस, बीमा और परमिट अधूरे होने पर वाहन को चारधाम मार्ग पर प्रवेश नहीं मिलेगा। वाहनों की तकनीकी जांच के लिए विशेष टीमें तैनात – पार्किंग ब्रेक, टायर चॉक, रेडियम त्रिकोणीय बोर्ड आदि की जांच होगी।

सड़क मार्गों पर युद्ध स्तर पर कार्य

संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर जाने वाले विकासनगर–यमुना ब्रिज मार्ग पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। PWD, BRO और NHAI के सहयोग से खतरनाक मार्गों की मरम्मत और चौड़ीकरण का कार्य तेज़ी से चल रहा है।

चारधाम यात्रा 2025 की प्रमुख तिथियाँ

30 अप्रैल 2025 – गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे
2 मई 2025 – केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे
12 मई 2025 – बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे

राज्य सरकार की कोशिश है कि हर श्रद्धालु की यात्रा न केवल आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक हो, बल्कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम भी हो। यात्रा से पहले और दौरान जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर, श्रद्धालु इस धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यात्रा का पूरा आनंद उठा सकेंगे।