बदल रहा है नौकरियों का बाजार, समझदारी से चुनें कोर्स

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  पेरेंट्स का दबाव कहें या पीयर प्रेशर, अक्सर छात्र एडमिशन के वक्त असमंजस की स्थिति में देखे जाते हैं। यहां तक कि जब वक्त होता है अपने किसी मनचाहे कोर्स में दाखिले का तो उस वक्त वे किसी नामी कॉलेज को तरजीह देने लगते हैं। कॉलेज की बजाए कोर्स से क्यों न करें समझौता

हर साल की तरह इस वर्ष भी बारहवीं के परिणाम के बाद किसी छात्र के मन में किसी विशेष यूनिवर्सिटी में एडमिशन का सपना होगा, तो कोई किसी खास इंस्टीटय़ूट या कॉलेज में प्रवेश को अपना लक्ष्य बना रहा होगा। आलम यह है कि 90 फीसदी अंक प्राप्त करने के बावजूद दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं मिल पाता। अब 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वालों की कतार काफी लंबी होती है। नतीजन छात्रों के लिए अपने मनपसंद कोर्स के साथ मनचाहे कॉलेज में दाखिला मिलने की संभावनाएं बेहद कम रहती हैं। यहां यह नहीं भूलना होगा कि एडमिशन की दौड़ में छात्र मनपसंद कोर्स के स्थान पर कॉलेज को वरीयता देने लगे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर आपको पहली ही कट ऑफ में अपना मनपसंद विषय मिल जाता है तो एडमिशन जरूर लेना चाहिए और अपनी सीट सुरक्षित करा लेनी चाहिए।

कोर्स या कॉलेज का चुनाव करते समय निम्न बिंदुओं पर खुद को जरूर परखें-
योग्यता
सबसे पहले देखें कि किस विषय की तरफ आपका रुझान है। उसके बाद अपनी योग्यताओं का भी जायजा लें। कुछ पल सोचें कि वे कौन से विशेष कोर्स हैं, जिनमें आप एडमिशन लेने का मन बना रहे हैं। खुद से ही ईमानदारी से पूछें कि क्या ग्रेजुएट लेवल पर ये विषय आपको बोझिल तो नहीं लगने लगेंगे या इनमें दिलचस्पी बरकरार रहेगी। इसी लाइन में बार-बार सोचने पर आपको अंत में मनचाहा कोर्स साफ दिखाई देने लगेगा। अगर आपको केमिस्ट्री आसान लगती है तो केमिस्ट्री ऑनर्स में ग्रेजुएशन करें, न कि बीएससी में अपना नाम एनरोल करवाएं। छात्र अक्सर यह सोच लेते हैं कि उनकी दिलचस्पी एक खास विषय में है तो उन्हें ग्रेजुएशन भी उसी में करनी चाहिए। ऐसा जरूरी नहीं है। अगर उस विषय को लेकर उनका ज्ञान कम है तो बाद के साल में उन्हें बोरियत होने लगेगी।

कोर्सेज 
कोर्स के लिए मन बनाने के बाद अपने मनपसंद कॉलेज में दाखिले के लिए उसे हरगिज न बदलें। आपको ऐसे कॉलेज की एक सूची तैयार करनी चाहिए, जहां आपका मनपसंद कोर्स पढ़ाया जाता है। इसके अलावा एक ट्रेंड देखा गया है कि बड़े कॉलेज से पढ़ाई करने बाद नौकरी मिलना मुश्किल नहीं होता। यह कुछ हद तक ठीक भी हो सकता है। कैम्पस प्लेसमेंट में निस्संदेह नौकरी मिलना आसान रहता है, लेकिन उस नौकरी में टिके रहना और करियर की ऊंचाई आपको अपना मनपसंद कोर्स ही दिला सकता है।

शॉर्टलिस्ट करें
मनपसंद कोर्सेज और कॉलेज में आत्ममंथन के बाद अब आपके पास सूची में कुछ ही गिने-चुने नाम बचे होंगे। और ऐसे में कॉलेज के लिए निर्णय लेना मुश्किल नहीं होगा।

कॉलेज चुनते समय
फीस: सामान्यत: देखा गया है कि नामचीन कॉलेज और ऐसे कोर्स, जिनकी मांग काफी ज्यादा है, उनकी फीस काफी भारी भरकम होती है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आप अपने कोर्स को ध्यान में रखते हुए ऐसे कॉलेज का चुनाव करें, जो आपकी जेब पर बोझ न बने। सिर्फ अपने पसंदीदा कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च करना व्यर्थ ही जाएगा, क्योंकि यहां बात तो सिर्फ ग्रेजुएशन की डिग्री लेने की है, फिर भले ही वह किसी दूसरे कॉलेज से क्यों न ली गई हो।

सुविधाएं क्या हैं: आज अधिकतर एडिमशन प्रोफेशनल कोर्स में लिए जा रहे हैं। मगर प्रोफेशनल कोर्सेज की पहली मांग है सुविधाएं। इन सुविधाओं की जरूरत कोर्स के दौरान पड़ेगी। इसीलिए पहले इस बारे में यह सुनिश्चित कर लीजिए कि कॉलेज में उससे संबंधित सभी सुविधाएं, जैसे लाइब्रेरी, इंटरनेट, हॉस्टल, प्ले ग्राउंड, प्रयोगशालाएं, आदि हैं भी कि नहीं।

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प्लान बी भी जरूरी
एक्सपर्ट्स के मुताबिक आपके पास कम से कम पांच कॉलेज का विकल्प जरूर हो। याद रहे अगर बारहवीं में अच्छे माक्र्स मिलने के बाद भी इसकी कोई गारंटी नहीं कि आपको आपके मनपसंद कॉलेज में दाखिला मिल ही जाएगा। ऐसे मौके के लिए आपका प्लान बी आपको इस मुश्किल से निकालने में मदद करेगा।

एडमिशन
जब आप एडमिशन की तैयारी इतना पहले से कर रहे हैं तो कॉलेज की लिस्ट के साथ-साथ आपने कोर्सेज में भी प्राथमिकता तय कर ली होगी। पहली कट ऑफ आने के बाद कुछ बदलाव होना भी स्वाभाविक है। लेकिन कोर्सेज को चुनने में अपनी वरीयता को हमेशा ध्यान में रखें। हमेशा एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आप अपने अहम मुद्दे कोर्स को न भूलें। हां, अगर आपके सामने कोई दूसरा विकल्प न बचे तो ऐसी स्थिति में आप कोर्स के लिए अपने दूसरे विकल्प को तरजीह दे सकते हैं। यह सिर्फ ऐसी स्थिति में करना बेहतर होगा, जब आपको आपकी पसंद का कोर्स न मिले। दिलचस्पी और ज्ञान, दोनों का होना जरूरी है। इसलिए गंभीरतापूर्वक विश्लेषण कर फिर सब्जेक्ट चुनना चाहिए। हां, अगर छात्र के अंक अच्छे हैं और एक ही कोर्स के लिए उसका नाम दो या अधिक कॉलेज में आता है तो उसे बेहतर कॉलेज के बारे में सोचना चाहिए, न कि बेहतर कॉलेज के लिए कोर्स से समझौता करना चाहिए।