
भारत और फ्रांस ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अपने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की है। इस दौरान असैन्य परमाणु ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह अहम बैठक पेरिस में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री और फ्रांस के विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स के बीच हुई। यह बातचीत भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श के तहत आयोजित की गई थी। अपनी यात्रा के दौरान विक्रम मिश्री ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार इमैनुएल बोन से भी मुलाकात की। उनकी यह यात्रा अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे के बाद हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। खासतौर पर फरवरी में इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के बाद संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने पर जोर दिया गया। बैठक में आर्थिक सुरक्षा, व्यापार और शिक्षा को लेकर भी अहम चर्चा हुई। दोनों देशों ने फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ाने और आपसी व्यापार को दोगुना करने की महत्वाकांक्षा जताई। यह बातचीत यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में भी सहमति बनी। सांस्कृतिक संबंधों और संस्थागत संवाद तंत्र को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
दोनों देशों ने वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिनमें जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का विकास, त्रिपक्षीय सहयोग और तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं। साथ ही पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे घटनाक्रमों पर भी चर्चा की गई। कुल मिलाकर, यह बैठक भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।












