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Friday, June 12, 2026
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देवीधूरा के जंगलों में भड़की भीषण आग, वन विभाग और दमकल टीमें आग बुझाने में जुटीं

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उत्तराखंड के नैनीताल जनपद स्थित देवीधूरा क्षेत्र के जंगलों में बुधवार को अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग लगने के बाद पूरे क्षेत्र में धुएं का गुबार फैल गया, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार दोपहर के समय जंगल के ऊपरी हिस्से में आग की लपटें दिखाई दीं। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलने लगी और देखते ही देखते जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। स्थानीय ग्रामीणों ने सबसे पहले धुआं और आग की लपटें देखीं, जिसके बाद तुरंत प्रशासन और वन विभाग को सूचना दी गई।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग को फैलने से रोकने के लिए फायर लाइन बनाई जा रही है और विभिन्न स्थानों पर पानी का छिड़काव कर आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आग आबादी वाले क्षेत्रों तक न पहुंचे, इसके लिए आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

प्रशासन ने वन कर्मियों के साथ स्थानीय स्वयंसेवकों को भी आग बुझाने के अभियान में शामिल किया है। कई टीमें लगातार जंगल के विभिन्न हिस्सों में निगरानी कर रही हैं और आग की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए आवश्यक संसाधन भी मौके पर पहुंचाए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। हालांकि शुरुआती अनुमान में गर्मी और सूखे मौसम को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ते तापमान और सूखी वनस्पतियों के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे वन विभाग की चिंता भी बढ़ गई है।

इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने जंगलों में आग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है और सरकार से स्थायी समाधान की मांग की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर वर्ष गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचता है।

वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि जंगलों के आसपास आग न जलाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आग की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। विभाग का कहना है कि जनसहयोग से ही ऐसी घटनाओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है और वन संपदा को बचाया जा सकता है।