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Saturday, January 17, 2026
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कुछ अलग है यहां की मान्यता, इस मंदिर में पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते मां के दर्शन….

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कहा जाता है कि पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं। कहा जाता है कि पति-पत्नी को हर काम मिलजुल कर करना चाहिए। किसी भी पूजा-पाठ में भी पति-पत्नी का साथ होना बेहद जरूरी और शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर पति-पत्नी पूजा-पाठ में एक साथ रहते हैं, तो इससे भगवान की कृपा दोनों पर एक साथ बनी रहती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां काफी अजीबों-गरीब परंपराएं निभाई जाती हैं। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां महिलाओं का जाना वर्जित है, तो वहीं कई मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर मनाही है। आज हम आपको एक इससे अलग परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां के मंदिर में पति-पत्नी एक साथ मां दुर्गा के दर्शन नहीं कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा भगवान शिव से जुड़ी एक मान्यता के कारण होता है।

यह मंदिर शिमला के रामपुर में स्थित है। इस मंदिर का नाम श्राई कोटि मंदिर है। ये मंदिर मां दुर्गा का है। इसे हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में पति और पत्नी के एक साथ मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना करने पर पाबंदी है। यदि किसी दंपत्ति ने ऐसा करने की कोशिश भी की, तो उसे इसकी सजा भुगतनी पड़ती है। इस मंदिर में दंपती जाते तो हैं पर एक बार में एक ही दर्शन करता है। यहां पहुंचने वाले दंपती में अलग-अलग समय में प्रतिमा के दर्शन करते हैं।

इसके मान्यता के पीछे का कारण भगवान शिव से जुड़ी एक कहानी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहां भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश को ब्रह्मांड की परिक्रमा करने को कहा। पिता का आदेश पाने के बाद कार्तिकेय ने पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा की, लेकिन गणेश जी ने माता पार्वती और शिव के चक्कर लगाए और उनकी चरणों में जाकर कहा कि माता-पिता के चरणों में ही पूरा ब्रह्मांड बसता है।

उधर जब कार्तिकेय ब्रह्मांड की परिक्रमा करके लौटे, तो उन्होंने देखा कि गणेश का विवाह हो चुका है। ये देखकर उन्हें गुस्सा आ गया और कार्तिकेय ने कभी शादी ना करने का फैसला किया। कार्तिकेय के इस संकल्प से मां पार्वती नाराज हो गईं और उन्होंने कहा कि यहां जो भी विवाहित जोड़ा एक साथ उनके दर्शन करेंगा, वो जल्द ही एक दूसरे से अलग हो जाएगा। तब से अबतक यहां कोई भी पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं।