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नंगली साहिब वाले सदगुरु गुरुदेव जी आरती (Satguru Aarti Nangli wale Guruji )

श्री सदगुरु गुरुदेव जी

श्री सदगुरु गुरुदेव जी आरती

आरती श्री गुरुदेव जी की गाऊं ।
बार-बार चरणन सिर नाऊं ॥

त्रिभुवन महिमा गुरु जी की भारी ।
ब्रह्मा विष्णु जपैं त्रिपुरारी ॥

राम कृष्ण भी बने पुजारी ।
आशीर्वाद में गुरु जी को पाऊं ॥

भव निधि तारण हार खिवैया ।
भक्तों के प्रभु पार लगैया ॥

भंवर बीच घूमे मेरी नैया ।
बार बार प्रभु शीष नवाऊं ॥

ज्ञान दृष्टि प्रभु मो को दीजै ।
माया जनित दुख हर लीजै ॥

ज्ञान भानु प्रकाश करीजै ।
आवागमन को दुख नहीं पाऊं ॥

राम नाम प्रभु मोहि लखायो ।
रूप चतुर्भुज हिय दर्शायो ॥

नाद बिंदु पुनि ज्योति लखायो ।
अखंड ध्यान में गुरु जी को पाऊं ॥

जय जयकार गुरु उपनायों ।
भव मोचन गुरु नाम कहायो ॥
श्री माताजी ने अमृत पायो ।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव का जन्‍म 5 September 1957 को कर्नाटक राज्‍य के मैसूर शहर में एक तेलुगु भाषी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक डॉक्टर थे। … ११ वर्ष की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग का अभ्यास करना शुरु किया। इनके योग शिक्षक थे श्री राघवेन्द्र राव, जिन्‍हें मल्‍लाडिहल्‍लि स्वामी के नाम से जाना जाता है।मैसूर विश्‍वविद्यालय से उन्‍होंने अंग्रजी भाषा में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की।