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Saturday, June 13, 2026
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नैनीताल मटन-चावल की दुकान से 50 लाख से अधिक का कारोबार, फिर भी नहीं कराया GST पंजीकरण

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हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे पर नयना गांव के पास स्थित एक चर्चित मटन-चावल की दुकान अब राज्य कर विभाग की जांच के दायरे में आ गई है। विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दुकान का वार्षिक कारोबार 50 लाख रुपये से अधिक है, लेकिन इसके बावजूद अब तक जीएसटी पंजीकरण नहीं कराया गया है। मामले के सामने आने के बाद विभाग ने दुकान संचालक को नोटिस जारी करते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

अधिकारियों के अनुसार हाल ही में सोशल मीडिया पर इस दुकान से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में दुकान पर बड़ी संख्या में ग्राहकों की भीड़ और भारी मात्रा में मटन-चावल की बिक्री का दावा किया गया था। वीडियो की चर्चा बढ़ने के बाद राज्य कर विभाग ने मामले का संज्ञान लिया और दुकान की व्यावसायिक गतिविधियों की जांच शुरू की।

असिस्टेंट कमिश्नर प्रकाश त्रिवेदी के नेतृत्व में विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान बिक्री और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य तथ्यों का आकलन किया गया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि दुकान का सालाना कारोबार जीएसटी पंजीकरण की निर्धारित सीमा से अधिक है, जबकि संचालक द्वारा अभी तक जीएसटी के तहत पंजीकरण नहीं कराया गया है।

राज्य कर विभाग ने दुकान संचालक को 12 जून तक जीएसटी पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण नहीं कराया गया तो जीएसटी कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि कर नियमों का पालन सभी व्यापारियों के लिए अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि यह दुकान स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। बड़ी संख्या में लोग यहां मटन-चावल का स्वाद लेने पहुंचते हैं, जिसके कारण इसकी बिक्री लगातार बढ़ती रही है। सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद यह दुकान और अधिक सुर्खियों में आ गई थी।

राज्य कर विभाग ने इस मामले को उदाहरण बताते हुए सभी व्यापारियों से अपील की है कि वे समय पर जीएसटी पंजीकरण और कर संबंधी अन्य औपचारिकताएं पूरी करें। विभाग का कहना है कि नियमों का पालन करने से व्यापारियों को भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

फिलहाल विभाग की नजर इस मामले पर बनी हुई है और आगे की कार्रवाई दुकान संचालक द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर किए जाने वाले अनुपालन पर निर्भर करेगी।