
देश में प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब तलब किया है। समिति ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने एनटीए से सबसे पहले यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसकी नजर में “पेपर लीक” की परिभाषा क्या है। इसके साथ ही एजेंसी से वर्ष 2018 से अब तक आयोजित परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की प्रश्नपत्र लीक या सुरक्षा चूक से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। समिति यह भी जानना चाहती है कि क्या एनटीए ने अपने स्तर पर किसी कथित अनियमितता या पेपर लीक की स्वतंत्र जांच कराई है, जबकि कई मामलों की जांच पहले से केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
इसके अलावा समिति ने एनटीए की प्रशासनिक और संस्थागत क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी से पिछले तीन वर्षों की कार्यप्रणाली, कुल कर्मचारियों की संख्या, वर्ष 2022 के बाद हुई नई नियुक्तियों और संगठनात्मक ढांचे से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई है। साथ ही परीक्षा सुधारों के लिए गठित राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों पर अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
बैठक के दौरान केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए। समिति ने पूछा कि इस प्रणाली से जुड़े टेंडर और चयन प्रक्रिया में बदलाव क्यों किए गए, तकनीकी मानदंडों में संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी और चयन शर्तों में ढील देने का आधार क्या था।
विशेष रूप से उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग गुणवत्ता से जुड़े मानकों में बदलाव को लेकर भी समिति ने चिंता जताई है। सदस्यों का मानना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी मानकों का उच्च स्तर बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे में इन बदलावों के पीछे के कारणों को स्पष्ट करना जरूरी है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में व्यापक बहस को जन्म दिया है। कई परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा, जबकि लाखों अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। इसी पृष्ठभूमि में संसद की यह समिति परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर रही है।
समिति ने NTA और CBSE दोनों को निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि जवाब मिलने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए नई सिफारिशें दे सकती है।













