
भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति बनाने में भारत को अहम कूटनीतिक सफलता मिली है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को हुए सम्मेलन के दौरान BRICS नेताओं ने ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026’ को स्वीकार किया। 140 बिंदुओं वाले इस घोषणा पत्र में वैश्विक शांति, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, व्यापार, तकनीक, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा रुख सामने आया है।
भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन की खासियत यह रही कि अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा घोषणा पत्र पर सहमति बनी। BRICS ने अपने सहयोग के लिए आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, समावेशिता और आम सहमति के सिद्धांतों को दोहराया। घोषणा पत्र में बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
पश्चिम एशिया और वैश्विक संघर्षों पर कूटनीति पर जोर
घोषणा पत्र में वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के साझा दृष्टिकोण को सामने रखा गया। BRICS नेताओं ने विवादों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने तथा देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए पश्चिम एशिया और अन्य संघर्षों के बीच यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ भी साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई और आतंकवाद के सभी रूपों तथा अभिव्यक्तियों की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।
स्थानीय मुद्राओं और सीमा-पार भुगतान पर बढ़ा सहयोग
आर्थिक क्षेत्र में BRICS देशों ने आपसी व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। घोषणा पत्र में BRICS देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक निपटान और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े प्रयासों का स्वागत किया गया है।
BRICS भुगतान कार्यबल की ओर से सीमा-पार भुगतान और भुगतान प्रणालियों के बीच परस्पर संपर्क की संभावनाओं पर किए जा रहे काम का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, घोषणा पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस क्षेत्र में कोई एक व्यवस्था सभी देशों के लिए समान रूप से लागू नहीं की जा सकती और प्रत्येक देश की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना होगा।
AI, डिजिटल ढांचे और महत्वपूर्ण खनिजों पर जोर
नई दिल्ली घोषणा पत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और उभरती तकनीकों में सहयोग को भी महत्व दिया गया। भारत की अध्यक्षता में BRICS ने तकनीकी विकास को अधिक समावेशी और जिम्मेदार बनाने तथा विकासशील देशों की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया।
इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े सहयोग को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना है।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर भारत का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के मंच से बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत की अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ के मुद्दों को BRICS के एजेंडे में प्रमुखता देने की कोशिश की गई।
घोषणा पत्र में भी BRICS के विस्तार और उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। सदस्य देशों ने BRICS के साझेदार देशों की भागीदारी बढ़ाने और साझा हितों वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने का समर्थन किया।
भारत की अध्यक्षता में बनी सहमति अहम उपलब्धि
18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय हुआ, जब दुनिया कई गंभीर भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव, व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं। ऐसे माहौल में साझा घोषणा पत्र पर सहमति बनाना भारत की अध्यक्षता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है।
नई दिल्ली घोषणा पत्र के जरिए BRICS ने राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क से जुड़े तीनों प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। घोषणा पत्र के अंत में सदस्य देशों ने भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता की सराहना की और 2027 में चीन की अध्यक्षता में होने वाले अगले शिखर सम्मेलन के लिए समर्थन जताया।













