
केंद्र सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश करने की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस बार भी बजट 1 फरवरी को ही संसद में पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि 1 फरवरी रविवार होने के बावजूद बजट की तारीख में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला संसदीय परंपरा और वित्तीय निरंतरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पिछले कई वर्षों से 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा चली आ रही है, ताकि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से पहले बजट से जुड़ी सभी विधायी प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जा सकें।
रविवार को विशेष सत्र
आमतौर पर सार्वजनिक अवकाश के दिन संसद की कार्यवाही नहीं होती, लेकिन बजट एक संवैधानिक और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में रविवार को बजट पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इससे पहले भी विशेष परिस्थितियों में सप्ताहांत पर बजट पेश किए जाने के उदाहरण रहे हैं।
हलवा समारोह से होगा आगाज़
बजट से पहले वित्त मंत्रालय में पारंपरिक ‘हलवा समारोह’ का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही बजट निर्माण से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की ‘लॉक-इन’ अवधि शुरू हो जाएगी, ताकि बजट की गोपनीयता बनी रहे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार भी डिजिटल माध्यम से बजट पेश करेंगी। बजट दस्तावेज़ ‘यूनियन बजट ऐप’ पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
बाजारों पर दिखेगा असर
रविवार को बजट पेश होने के कारण शेयर बाजार उस दिन बंद रहेंगे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को बजट का गहन विश्लेषण करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इसका असर सोमवार को बाजार खुलने पर साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।
‘विकसित भारत’ पर फोकस
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले कदमों पर खास जोर हो सकता है। सरकार का लक्ष्य भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में ठोस और सुधारात्मक फैसले लेना है।कुल मिलाकर, रविवार को पेश होने वाला यह बजट देश की आर्थिक दिशा और भविष्य की नीतियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।













