
भारत ने पिछले एक दशक में गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से अधिक नागरिक बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक विकास, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में भारत के मजबूत कदमों को दर्शाती है।
राज्यों में तेजी से घटी गरीबी
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े और आबादी वाले राज्यों में गरीबी की दर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि गरीबी को अब केवल आय के पैमाने से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे बहुआयामी संकेतकों के आधार पर आंका जा रहा है।
बहुआयामी दृष्टिकोण बना बदलाव की वजह
रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा तक बढ़ती पहुंच और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने करोड़ों लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाया है। खासतौर पर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच ने गरीबी की जड़ पर असर डाला है।
इन योजनाओं ने बदली तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की लक्षित योजनाओं ने गरीबी घटाने में निर्णायक भूमिका निभाई है:
- खाद्य सुरक्षा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन ने करोड़ों गरीब परिवारों को भुखमरी और कुपोषण से बचाया।
- आवास और स्वच्छता: प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन के जरिए पक्के मकान और शौचालय मिलने से लोगों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: आयुष्मान भारत योजना ने गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाले भारी खर्च से गरीबों को राहत दी।
- वित्तीय समावेशन: जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़कर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को मजबूत किया गया।
सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आया वंचित वर्ग
सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों, छोटे किसानों और मजदूरों को पेंशन और बीमा योजनाओं से जोड़ने से सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक हुआ है। इसके साथ ही जल जीवन मिशन के तहत नल से जल और उज्ज्वला योजना के जरिए एलपीजी कनेक्शन ने खासकर ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई है।
विकसित भारत की ओर मजबूत कदम
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना इस बात का प्रमाण है कि भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और टिकाऊ आजीविका पर लगातार फोकस जरूरी होगा, ताकि लोग दोबारा गरीबी के चक्र में न फंसें।












