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Wednesday, January 21, 2026
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यूपी सरकार अब अपनी पसंद का चुन सकेगी DGP; कैबिनेट ने नियमावली को दी मंजूरी!

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योगी आदित्यनाथ सरकार ने पुलिस महानिदेशक (DGP) चयन नियमावली 2024 को मंजूरी दे दी है. इसके तहत अब यूपी में डीजीपी पद के लिए लोक सेवा आयोग को अधिकारियों के नाम नहीं भेजने पड़ेंगे. सरकार अपनी पसंद के आईपीएस अफसर को पुलिस महानिदेशक बना सकेगी. इसके लिए छह सदस्य चयन कमेटी का गठन किया गया है. उत्तर प्रदेश देश का अब चौथा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने डीजीपी नियमावली को मंजूरी दी है. उत्तर प्रदेश सरकार की सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में डीजीपी नियमावली 2024 को मंजूरी दी थी.

संघ लोक सेवा आयोग को नहीं भेजने पड़ेंगे अधिकारियों के नाम

अब रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली पांच सदस्य कमेटी डीजीपी का सिलेक्शन करेगी. इस समिति में मुख्य सचिव, यूपीएससी की तरफ से नामित एक अफसर, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या उनकी ओर से नामित व्यक्ति, अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव गृह और एक रिटायर्ड डीजीपी शामिल रहेंगे. अभी तक उत्तर प्रदेश में पिछले तीन सालों से स्थाई पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति नहीं की जा सकी है. अब नई नियमावली बनने के बाद सरकार को स्थाई तौर पर डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग की मंजूरी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

दो साल का होगा कार्यकाल

बता दें कि साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति को लेकर एक याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस व्यवस्था को सभी दबाव से मुक्त करने के लिए प्रदेश सरकारों से नई व्यवस्था बनाने की बात कही थी. इसके बाद पंजाब, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सरकारों ने पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से संबंधित नियमावली बना ली. अब उत्तर प्रदेश देश का चौथा राज्य बन गया है, जिसने डीजीपी की नियुक्ति के लिए नई नियमावली तैयार की है. इस नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि अब पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति आईपीएस अफसर के बेहतर सेवा रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर ही होगी. उन्हीं अफसर को चयन के लिए अहमियत दी जाएगी, जिनका कम से कम छह माह का कार्यकाल शेष हो. डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जाएगी. हालांकि इसी नियमावली में यह भी शर्त रखी गई है कि अगर सरकार डीजीपी के काम से असंतुष्ट होती है तो पद से हटा भी सकती है.

क्या था पुराना निमय?

वर्तमान चयन प्रक्रिया की बात की जाए तो यूपी में डीजीपी चयन की व्यवस्था यह है कि सरकार पुलिस सेवा में 30 साल पूरा कर चुके उन अफसर का नाम लोक सेवा आयोग को भेजती थी, जिनका कम से कम छह माह का कार्यकाल बाकी हो. संघ लोक सेवा आयोग को सरकार तीन अफसरों के नाम का पैनल भेजती थी जिसमें से सरकार किसी एक को डीजीपी नियुक्त करती थी. वर्तमान में यूपी के कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार हैं. वह 31 मई 2025 को रिटायर होंगे. अभी उनके रिटायर होने में छह माह से ज्यादा का समय है. नई नियमावली लागू होने पर सिलेक्शन कमिटी डीजीपी प्रशांत कुमार के नाम पर भी विचार कर सकती है.