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Friday, January 30, 2026
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प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक हंगामे के बीच लोकसभा में पारित

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लोकसभा ने बुधवार को कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ‘प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020’ को मंजूरी दे दी। इस विधेयक का मकसद लंबित कर विवादों का समाधान करना है। दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही बाधित रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को शोर-शराबे के बीच इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था। उन्होंने बुधवार उसमें कुछ संशोधन का प्रस्ताव किया। सदन ने शोर-शराबे के बीच ही कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकृत करने के बाद उक्त विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।

बजट में घोषित प्रत्यक्ष कर विवाद निपटान की योजना से लोगों को मामले का निपटारा करने में होने वाले खर्च और समय बचाने में काफी मदद मिलेगी। यह विधेयक ऐसी स्थिति में लाया गया है जब विभिन्न अदालतों, कर्ज वसूली न्यायाधिकरण अपीलीय निकायों में प्रत्यक्ष कर से जुड़े 9.32 लाख करोड़ रुपये के 4.83 लाख मामले लंबित हैं। यह सरकार के 2018-19 में प्रत्यक्ष कर राजस्व का 82 प्रतिशत है। योजना का न केवल कर विवाद से जुड़े मामले में बल्कि 5 करोड़ रुपये तक की वसूली से जुड़ी तलाशी और जब्ती कार्रवाई में इसका उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तावित योजना के तहत जो करदाता विवाद का निपटान करना चाहते हैं,

उन्हें 31 मार्च 2020 तक विवादित करों की राशि का भुगतान करना होगा और उसे ब्याज एवं जुर्माने पर पूरी छूट मिलेगी। ऐसा नहीं करने पर विवादित कर देनदाररी पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगताना करना होगा। पुन: जिन मामलों में केवल ब्याज या जुर्माना बनता है, वहां विवादित ब्याज या जुर्माने का 25 प्रतिशत 31 मार्च तक भुगतान करना होगा। उसके बाद यह राशि बढ़कर 30 प्रतिशत हो जाएगी। योजना 30 जून 2020 तक खुली रहेगी। विवाद से विश्वास विधेयक को शीघ्र पारित कराना जरूरी है क्योंकि ब्याज और जुर्माने से छूट लाभ लेने की अंतिम तिथि 31 मार्च है। विधेयक अब राज्यसभा में जाएगा। चूंकि यह विधेयक धन विधेयक की श्रेणी में आता है, अत: राज्यसभा की मंजूरी की जरूरत नहीं है।

धन विधेयक को केवल लोकसभा से पारित कराने की आवश्यकता होती है। राज्ससभा उस पर चर्चा कर सकती है और वह केवल उसमें बदलाव के लिये लोकसभा को सुझाव दे सकती है। इस बारे में ईवाई इंडिया के कर भागीदार सतीर काराबार ने कहा, ‘‘करदाताओं के पास विवाद से विश्वास योजना का लाभ लेने के लिये मार्च अंत तक ही समय है। इसकी समयसीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल 2020 करना स्वागत योग्य होगा।’’ डेलायॅट इंडिया के भागीदार गोकुल चोधरी ने कहा, ‘‘संशोधित शर्तें भारी संख्या में लंबित कर मामलों को कम करने की दिशा में सरकार के गंभीर प्रयास को प्रतिबिंबित करती हैं। इससे कंपनियां कानूनी विवाद से से निकल सकती हैं जिससे प्रबंधन के पास दूसरे कार्यों के लिये समय बचेगा…।’’