
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान और इजरायल के बीच चल रही मिसाइल जंग और खतरनाक समुद्री हालात के बीच कच्चे तेल से लदा एक विशाल भारतीय जहाज सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुँच गया। जहाज की यह सफल वापसी उसके भारतीय कैप्टन की साहसिक रणनीति और सूझबूझ का परिणाम मानी जा रही है। जिस समय आसमान में मिसाइलें और ड्रोन मंडरा रहे थे, उस समय कैप्टन ने बेहद सावधानी के साथ जहाज को सुरक्षित रास्ते से निकालकर चालक दल और करोड़ों के तेल को बचा लिया।
यह जहाज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से होकर निकला, जहां इन दिनों युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में वहां से गुजरना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं था।
आधी रात का ‘ऑपरेशन एस्केप’
जानकारी के मुताबिक जहाज के कैप्टन ने दुश्मन की नजरों से बचने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए। उन्होंने जहाज का ऑटोमैटिक पहचान प्रणाली (एआईएस) बंद कर दिया, जिससे रडार और सेंसर के जरिए जहाज को ट्रैक करना मुश्किल हो गया। पूरे सफर के दौरान रेडियो सिग्नल भी बंद रखे गए, ताकि जहाज की लोकेशन किसी को पता न चल सके।
सफर के दौरान कई बार आसमान में मिसाइलों की चमक दिखाई दी। ऐसे समय में कैप्टन ने जहाज का मार्ग अचानक बदलते हुए उसे संभावित हमले की रेंज से बाहर निकाल लिया।
चालक दल का हौसला बनाए रखा
मुंबई पहुँचने के बाद जहाज के कैप्टन ने बताया कि हालात बेहद तनावपूर्ण थे। समुद्र में चारों तरफ युद्धपोत और संदिग्ध ड्रोन दिखाई दे रहे थे। जहाज पर मौजूद सभी 22 भारतीय चालक दल के सदस्य डरे हुए थे, लेकिन लगातार बातचीत और सतर्कता के जरिए उनका हौसला बनाए रखा गया।
उन्होंने यह भी बताया कि ओमान की खाड़ी में प्रवेश करने के बाद भारतीय नौसेना के युद्धपोतों से उन्हें सुरक्षा संकेत मिलने लगे, जिससे चालक दल का आत्मविश्वास बढ़ गया।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी राहत
जहाज में भारत के लिए महत्वपूर्ण कच्चा तेल लदा हुआ है। मौजूदा वैश्विक संकट के बीच इसका सुरक्षित मुंबई पहुँचना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।
मुंबई तट पर जहाज के पहुँचते ही शिपिंग मंत्रालय और बंदरगाह अधिकारियों ने राहत की सांस ली। रक्षा विशेषज्ञों ने इस मिशन में कैप्टन की बहादुरी और भारतीय नौसेना के सहयोग की भी सराहना की है।













