
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उत्पन्न ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच पोलैंड अब अपने व्यापारिक पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए भारत की ओर देख रहा है। पोलैंड के वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि वे चीन और अन्य पारंपरिक बाजारों पर अपनी निर्भरता कम कर भारत के साथ मजबूत और दीर्घकालिक आर्थिक गठबंधन बनाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पोलैंड के लिए न केवल एक विशाल उपभोक्ता बाजार है, बल्कि आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों में वैश्विक शक्ति भी है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता होने की संभावना है, जो रक्षा, कृषि और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नए समझौतों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
पोलैंड अपनी बढ़ती आर्थिक और तकनीकी जरूरतों के लिए भारत को यूरोप में प्रवेश द्वार के रूप में देख रहा है। इसके अलावा पोलैंड भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादन में रुचि रखता है और खाद्य प्रसंस्करण तकनीक के आदान-प्रदान में भी सहयोग चाहता है।
दोनों देशों के बीच आईटी और डिजिटलीकरण, हरित ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। भारत की आईटी कंपनियां पोलैंड में डिजिटल बुनियादी ढांचा मजबूत कर रही हैं, जबकि पोलैंड भारत के ‘गति शक्ति’ मिशन और बंदरगाह विकास में निवेश की संभावना तलाश रहा है।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर और भारत-यूरोपीय संघ के बीच FTA वार्ता की धीमी गति द्विपक्षीय व्यापार को पूरी तरह से बढ़ाने में बाधा बन सकती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, पोलैंड का भारत के साथ साझेदारी बढ़ाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के एशिया की ओर खिसकने का संकेत है। यदि दोनों देश व्यापारिक और कूटनीतिक बाधाओं को पार कर लेते हैं, तो यह साझेदारी न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी होगी, बल्कि यूरोप और एशिया के बीच नया शक्ति संतुलन भी स्थापित कर सकती है।













