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Thursday, January 22, 2026
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इन बड़े गुरुद्वारे में जाकर इस बार खास तरीके से मनाएं लोहड़ी

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लोहड़ी का त्योहार बड़े उल्लास के साथ हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। उमंग और उल्लास से भरपूर वो त्यौहार जिसमें जोश की कोई कमी नहीं होती। वैसे तो लोहड़ी का त्योहार पंजाब से जुड़ा हुआ है लेकिन भारत में हर धर्म का व्यक्ति इसकी रौनक और गर्माहट महसूस करता है

पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत में अब लोहड़ी (Lohri) का पर्व पूरी धूमधाम से मनाया जाने लगा है लेकिन जो रौनक इस दौरान पंजाब में देखने को मिलती है वो शायद और कहीं आपको नहीं मिलेगी।

गुड़ पट्‌टी और गज्जक की मिठास, मूंगफली की महक और अपनों का आशीर्वाद…थोड़ी सी मस्ती थोड़ा सा प्यार यही तो है लोहड़ी का त्यौहार। जी हां…यही है लोहड़ी के त्यौहार की पहचान। कई दिनों पहले ही लोहड़ी पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती है।

मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले ही होता है ये त्यौहार..शाम के समय दिन ढलने के बाद अग्नि प्रजवल्लित की जाती है और उसका घेरा बनाकर उसमें रेवड़ी, मूंगफली गज्जक, गुड़पट्‌टी का भोग लगाते हैं और फिर यही प्रसाद सभी को बांटा जाता है। भई…लोहड़ी का पर्व हो और गाना बजाना ना हो ऐसा तो कैसे हो सकता है।

लोहड़ी खेतों में लगी फसलों की काटे जाने की वजह से मनाई जाती है। इसके बाद फसलों को अग्नि को अर्पित किया जातादेश के कई बड़े गुरुद्वारे हैं, जहां आप लोहड़ी मना सकते हैं।

अलग-अलग जगहों से आए लोगों के साथ मिलकर लोहड़ी मनाएं और इस बार की लोहड़ी को यादगार बनाएं। तो हम आपको बताते हैं कि इन गुरुद्वारों के बारे में जहां आप अपनी लोहड़ी को यादगार बना सकते हैं।

पंजाब

पंजाब के रुद्रपुर जिले में केशगढ़ साहिब गुरुद्वारा मौजूद है। आनन्दपुर साहिब शहर की स्थापना नौंवे गुरु तेग बहादुर जी द्वारा सन् 1664 में की गई थी। उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने लगभग 28 वर्षों तक यहां निवास किया था।

आनन्दपुर साहिब के तख्त श्री केसगढ़ साहिब में ही गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 में पंज प्यारों की उपाधि दी थी और खालसा पंथ की शुरुआत हुई थी। यहां पर लोहड़ी के साथ-साथ होली भी बहुत धूम-धाम ले मनाई जाती है।

हिमालय में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है. यहाँ पर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पिछले जीवन में ध्यान साधना की थी और वर्तमान जीवन लिया था।

यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड के चमोली जिले में मौजूद है। लोहड़ी के वक्त यहां पर काफी संख्या में लोग आते हैं और त्यौहार मनाते हैं। पूरे साज्जो-सज्जा के साथ इस त्यौहार को मनाया जाता है।