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Friday, September 11, 2026
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संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र पर भारत की कड़ी आपत्ति, अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के चित्रण पर उठाए सवाल

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संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत और चीन की अलग-अलग दावा रेखाओं के बीच दिखाए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने साफ कहा है कि अपने संप्रभु क्षेत्र का किसी भी तरह का गलत या भ्रामक चित्रण उसे स्वीकार नहीं है।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर को अफ्रीकी संघ की पहल पर लाए गए ‘Correct the Map’ प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। भारत समेत 164 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य दुनिया के नक्शों में देशों और क्षेत्रों को उनके वास्तविक आकार के अधिक संतुलित रूप में दिखाना है।

भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन केवल नक्शों में क्षेत्रफल को सही और संतुलित तरीके से दिखाने के सिद्धांत के आधार पर किया था। भारत का कहना है कि प्रस्ताव के समर्थन का मतलब किसी खास नक्शे या सीमा-चित्रण को स्वीकार करना नहीं है।

नए नक्शे में क्या है विवाद

संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में अरुणाचल प्रदेश को अलग क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। इसमें राज्य की उत्तरी सीमा को ‘भारतीय रेखा’ और दक्षिणी सीमा को ‘चीनी रेखा’ के रूप में दर्शाया गया है। इसके अलावा असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा तथा अरुणाचल प्रदेश की नगालैंड से लगी सीमा के चित्रण को लेकर भी सवाल उठे हैं।

इसी तरह अक्साई चिन को भी अलग क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। भारत अक्साई चिन को लद्दाख का हिस्सा मानता है, जबकि वर्तमान में इस क्षेत्र पर चीन का नियंत्रण है। नए नक्शे में इसके आसपास भी भारत और चीन की अलग-अलग सीमा रेखाएं दिखाई गई हैं।

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की ओर से नक्शे में इन बदलावों को लेकर अभी कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।

भारत ने स्पष्ट किया अपना रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने ‘Correct the Map’ प्रस्ताव का समर्थन किसी विशेष नक्शे या सीमा-चित्रण को मंजूरी देने के लिए नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के सभी संप्रभु क्षेत्रों को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव किसी देश की सीमा या किसी खास नक्शे को कानूनी मान्यता नहीं देता। इसलिए भारत का समर्थन केवल नक्शों में क्षेत्रों को समान और संतुलित तरीके से दिखाने के सिद्धांत तक सीमित था।

भारत ने दोहराया है कि अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख समेत उसके संप्रभु क्षेत्रों को लेकर उसकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और वह अपने क्षेत्र के किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण को स्वीकार नहीं करेगा।