बीजेपी और TMC में रार, बुनियादी समस्याएं बरकरार पश्चिम बंगाल….

0

ममता बनर्जी के किले में जबसे बीजेपी ने सेंध लगाई है तब से ममता दीदी तिलमिलाए अंदाज में नजर आ रही हैं। आलम तो ये है कि अब ममता को जय श्री राम से इतना परहेज हो चला है कि अगर उनके काफिले के सामने आकर कोई राम का नाम भी लेता है तो मानो उसकी खैर नहीं।

ममता बनर्जी की कोशिश तो बीजेपी की विचारधारा पर सवाल उठाने की है लेकिन उनकी ये चिढ़न आम लोगों के गले नहीं उतर रही है। क्योंकि भारत में राम का नाम सबके मनमस्तिष्क में बसता है और ये किसी धर्म या पार्टी का नारा नहीं बल्कि भगवान को याद करने का एक माध्यम है। इसलिए शायद अब ममता बनर्जी अपने इस हिटलर रवैये के चलते खुद की ही शिकार होती जा रही हैं।  एक फ़ेसबुक पोस्ट के जरिए बीजेपी और मीडिया के एक धड़े पर उन्होंने जमकर हमला बोलते हुए कहा कि ‘ऐसे किसी भी राजनीतिक पार्टी के ऐसे कार्यकर्ता जो धर्म के नाम पर लोगों को बांट रहे हो। समाज में अशांति फैला रहे हो उन पर उचित कार्रवाई करने का समय आ गया है।’

 धर्म और राजनीति को मिलाने का आरोप लगाने वाली ममता शायद ये भूल गई हैं कि ये भारत में राम मंदिर के मुद्दे को भी उतनी ही प्रमुखता दी जाती है जितनी की रोटी कपड़ा और मकान को।

पश्चिम बंगाल में पुलिस ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के काफिले के सामने जय श्रीराम का नारा लगाने के आरोप में कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और साथ ही लाठीचार्ज कराने का भी आरोप है। इसी कड़ी में दो युवकों को मुख्यमंत्री का काफिला रोकने के आरोप में गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। अब इन सबके बीच बीजेपी और TMC के बीच लड़ाई और भी तीखी हो चली है, बैरकपुर से बिजेपी के नवनिर्वाचित सांसद अर्जुन सिंह ने ऐलान किया है कि वो ममता बनर्जी को 10 लाख पोस्टकार्ड भेजेंगे। इतन ही नहीं ममता बनर्जी को चुनौती भी दी है कि अगर दम है तो 10 लाख लोगों को गिरफ्तार करके दिखाएं।

देखा जाए तो ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के हर फैसले का विरोध करने की ठान रखी है इसीलिए उन्होंने सेना के पराक्रम को भी खारिज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और सर्जिकल स्ट्राइक के भी सबूत मांग लिए थे। एकतरफ तो ममता बनर्जी लगातार बीजेपी पर लोकतंत्र की भावना की हत्या का आरोप लगाती हैं लेकिन दूसरी तरफ खुद अपनी फोटोशॉप तस्वीर के जुर्म गिरफ्तारी करवाती हैं, जय श्री राम बोलने पर गिरफ्तारी करवाती हैं। ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या ममता इस तानाशाही अंदाज के ही चलते 2019 लोकसभा चुनाव में जनता के कटघरे में खड़ी हो गई?

पिछले वर्षों में पश्चिम बंगाल की राजनीति को धर्म के चश्में से देखने का चलन बढ़ा है, इस तनातनी में नुकसान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों का हो रहा है… स्थिती तो इतनी संवेदनशील है कि 2017 में उत्तर 24 परगना में हिंसा की वजह केवल एक तस्वीर बन गई जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। यानि कि स्थिती एकदम साफ है, इस राज्य पर भी इस तरह की भड़काओ राजनीति का असर पड़ रहा है।

इन सभी आरोपों के बीच पश्चिम बंगाल की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, पेयजल समस्या, बेरोजगारी, गरीबी और शिक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख चिंता का विषय हैं लेकिन राजनीति की करवट केवल सत्ता की लालसा में बैठी है। ताजा मामला पश्चिम बंगाल के बंकुरा जिले का है जहां एक गांव में लोग पानी की भयंकर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। यहां के हालात इतने बुरे हैं कि लोगों को पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि नेता सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने के लिए यहां का रुख करते हैं, वरना किसी को हमारी समस्याओं का ख्याल नहीं रहता। यहां पर आदिवासी जनजाति संथला की लगभग 400 आबादी निवास करती है जो कि भयंकर पानी की समस्या से जूझ रही है। इसी तरह से कई ऐसी समस्याएं जिसका सामना पश्चिम बंगाल के निवासियों को करना पड़ रहा हैं लेकिन राजनीति का पैमाना केवल हिंदू बनाम मुस्लिम पर जाकर अटक गया है।

यदि आप पत्रकारिता क्षेत्र में रूचि रखते है तो जुड़िए हमारे मीडिया इंस्टीट्यूट से:-