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Tuesday, June 9, 2026
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भारत-नेपाल रिश्तों में नया अध्याय लिखने का समय, एस. जयशंकर, द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर

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भारत और नेपाल के बीच संबंधों को नई दिशा और नई ऊर्जा देने की कोशिशों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दोनों देशों के रिश्तों में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और नेपाल केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और लोगों के बीच गहरे संबंधों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में ऊर्जा, सीमा पार कनेक्टिविटी, डिजिटल सहयोग, व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुखता से उठाए गए। जयशंकर ने कहा कि इन क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाकर दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

बैठक के दौरान सीमा से जुड़े मुद्दों और अन्य संवेदनशील विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। हालांकि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मतभेदों को संवाद, आपसी सम्मान और विश्वास के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। नेताओं ने यह भी माना कि विवादों पर अधिक ध्यान देने के बजाय सहयोग के नए अवसरों को प्राथमिकता देना दोनों देशों के हित में होगा।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी भारत के साथ संबंधों को “परिवर्तनकारी” बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल का सबसे करीबी पड़ोसी और एक महत्वपूर्ण विकास साझेदार है। खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल अतीत की कटुताओं और विवादों को पीछे छोड़कर विकास, आर्थिक समृद्धि और क्षेत्रीय सहयोग के साझा एजेंडे पर आगे बढ़ना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा व्यापार, जलविद्युत परियोजनाओं, सड़क और रेल कनेक्टिविटी तथा डिजिटल क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। ऐसे में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई यह वार्ता भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को देखते हुए यह बैठक केवल कूटनीतिक संवाद नहीं, बल्कि साझा विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक नई शुरुआत के रूप में भी देखी जा रही है।