
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की दिशा में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप परीक्षण की सफलता के साथ भारत ने अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की तकनीक को और मजबूत कर लिया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस सफलता पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप परीक्षण गगनयान मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग के लिए पैराशूट प्रणाली का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के दौरान एक डमी मॉड्यूल को विमान से ऊंचाई पर गिराया गया, जहां पैराशूट सही समय पर खुले और मॉड्यूल को सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। इससे यह साबित हुआ कि रिकवरी सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद है।
गगनयान मिशन के तहत भारत पहली बार अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगा। योजना के अनुसार तीन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग तीन दिन तक रहकर वैज्ञानिक कार्य करेंगे। फिलहाल मानवरहित परीक्षण जारी हैं और इनके सफल होने के बाद जल्द ही मानवयुक्त मिशन भेजा जाएगा।
इस मिशन की सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास मानव को अंतरिक्ष में भेजने की स्वदेशी क्षमता है। अभी तक यह उपलब्धि केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास है।
गगनयान मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलटों—प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप और शुभांशु शुक्ला—का चयन किया गया है, जो विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
यह मिशन न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में देश को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।













