
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच मंगलवार को फोन पर अहम बातचीत हुई। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए इस बातचीत की पुष्टि की। मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों नेताओं की यह चर्चा वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मिडिल ईस्ट हालात पर चर्चा
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। खासतौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की अहमियत पर जोर दिया गया, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
युद्ध के बीच पहली बातचीत
मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच यह पहली बातचीत बताई जा रही है। यह कॉल ऐसे समय हुई है, जब ट्रंप ने एक दिन पहले ही ईरान के साथ “सकारात्मक बातचीत” का दावा करते हुए उसके ऊर्जा ठिकानों पर पांच दिनों तक हमले टालने का ऐलान किया था।
हालांकि, इसके बावजूद ईरान और इजरायल के बीच हमले जारी हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
बैकचैनल बातचीत के संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत भी चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका एक “सम्मानित ईरानी नेता” के संपर्क में है, हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह नेता मोज्तबा खामेनेई नहीं हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में मोहम्मद बाघेर गालिबाफ का नाम सामने आया है, लेकिन उन्होंने इन दावों को खारिज कर दिया है। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच सीधी बातचीत की भी चर्चा है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वैश्विक नजरें टिकीं
मौजूदा हालात में दुनिया की नजरें अमेरिका, भारत और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत का सिलसिला जारी रहता है, तो यह क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।













