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Thursday, March 5, 2026
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ईरान-इजरायल युद्ध का असर आसमान पर, 1500 उड़ानें रद्द

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ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब वैश्विक हवाई यातायात पर दिखने लगा है। पिछले चार दिनों में दुनिया भर की एयरलाइंस को करीब 1500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए हैं। मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र असुरक्षित होने के चलते कई देशों ने अपने विमानों के रूट बदल दिए हैं। इसी बीच भारत के विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भारतीय एयरलाइंस के लिए ‘हाई-रिस्क जोन’ एडवायजरी जारी की है। इसके तहत भारतीय विमानों को ईरान, इराक और जॉर्डन के ऊपर से उड़ान भरने से परहेज करने को कहा गया है। इससे यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों की अवधि और किराया दोनों बढ़ने की आशंका है।

संघर्ष के बीच मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों ने नागरिक विमानों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। एयर इंडिया, इंडिगो और विस्तारा जैसी भारतीय एयरलाइंस अब ईरान के ऊपर से गुजरने के बजाय अरब सागर और मध्य एशिया के लंबे मार्गों का उपयोग कर रही हैं। इससे उड़ानों के समय में 1 से 2 घंटे तक की बढ़ोतरी हुई है और विमान ईंधन (ATF) की खपत बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी लागत का असर टिकट कीमतों पर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई बड़ी एयरलाइंस ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए सेवाएं स्थगित कर दी हैं। लुफ्थांसा, एमिरेट्स और कतर एयरवेज ने तेल अवीव, तेहरान और बेरुत के लिए अपनी उड़ानों पर अस्थायी रोक लगा दी है।

DGCA ने अपनी एडवायजरी में एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे संघर्ष क्षेत्रों के पास से गुजरने वाले किसी भी ‘हाई-रिस्क’ रूट से बचें। पायलटों को रियल-टाइम मॉनिटरिंग बनाए रखने और ग्राउंड कंट्रोल से लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है। साथ ही आकस्मिक स्थिति में वैकल्पिक लैंडिंग एयरपोर्ट की स्पष्ट योजना तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

उड़ानें रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हजारों लोगों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूट गई हैं और वे विदेशी हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। खाड़ी देशों और यूरोप जाने वाले टिकटों के दामों में 20% से 40% तक उछाल की खबरें हैं। हालांकि अधिकांश एयरलाइंस यात्रियों को मुफ्त री-शेड्यूलिंग या पूर्ण रिफंड देने का आश्वासन दे रही हैं, लेकिन कॉल सेंटर्स पर दबाव बढ़ने से प्रक्रिया धीमी हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक वैश्विक विमानन क्षेत्र पर इसका असर जारी रह सकता है।