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Tuesday, January 20, 2026
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वारसॉ से भारत का दो-टूक संदेश, आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं – एस. जयशंकर

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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पोलैंड की राजधानी वारसॉ में आयोजित द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट और सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक साझा खतरा है, और इसे किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

विदेश मंत्री ने विशेष रूप से यूरोपीय देशों, खासकर पोलैंड, से अपील की कि वे भारत के पड़ोस में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली ताकतों को किसी भी प्रकार की सहायता या समर्थन न दें। उन्होंने दो टूक कहा कि जो देश आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उनके प्रति नरमी वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा है।

आतंकवाद पर जयशंकर के सख्त संदेश के मुख्य बिंदु

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में भारत की नीति को साफ शब्दों में रखा –

  • दोहरा मापदंड नहीं चलेगा: जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘अच्छे आतंकवादी’ और ‘बुरे आतंकवादी’ जैसी कोई अवधारणा नहीं हो सकती।
  • क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा: उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण एशिया की स्थिरता पूरी दुनिया के हित में है, लेकिन आतंकवाद को पनाह देने वाले पड़ोसी देश इस स्थिरता के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
  • वैश्विक जिम्मेदारी: जयशंकर ने पोलैंड से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) को रोकने के भारत के प्रयासों का समर्थन करे।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार वैश्विक मंचों पर ‘क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म’ का मुद्दा मुखरता से उठा रहा है।

भारत-पोलैंड संबंधों को नई गति

आतंकवाद के मुद्दे के साथ-साथ बैठक में भारत और पोलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर भी व्यापक चर्चा हुई

  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। जयशंकर ने पोलैंड को मध्य यूरोप में भारत का अहम रणनीतिक साझेदार बताया।
  • व्यापार और निवेश: भारत ने पोलैंड के निवेशकों को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियानों से जुड़ने का निमंत्रण दिया।
  • यूक्रेन संकट पर विमर्श: बैठक में यूक्रेन-रूस युद्ध के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव और शांति बहाली के प्रयासों पर भी गहन चर्चा हुई।

कूटनीतिक संदेश के गहरे मायने

कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, वारसॉ में जयशंकर का यह बयान उन देशों के लिए सीधी चेतावनी है जो पाकिस्तान के साथ सैन्य या आर्थिक रिश्ते बनाते समय भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करते रहे हैं। भारत अब अपनी ‘हार्ड पावर’ और ‘सॉफ्ट पावर’ दोनों का इस्तेमाल कर यह स्पष्ट कर रहा है कि आतंकवाद के मुद्दे पर तटस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है।

भारत की बदली हुई कूटनीतिक तस्वीर

एस. जयशंकर की यह पोलैंड यात्रा दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक कूटनीति में अपनी शर्तों पर बात करने की स्थिति में है। आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा—यह संदेश पूरी दुनिया तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बातचीत आने वाले समय में भारत-पोलैंड संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।