
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। वायरल वीडियो के बाद कांग्रेस ने जहां कथित वीआईपी का नाम उजागर करने और सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है, वहीं भाजपा ने इसे चुनावी राजनीति और दुष्प्रचार करार दिया है।
मंत्री सुबोध उनियाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने कभी जांच से मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच को न्यायालयों ने सही ठहराया है और कोर्ट ने सीबीआई जांच की जरूरत नहीं मानी। “आरोप लगाने से पहले सबूत लाए जाएं,” — यह विपक्ष के लिए सरकार का स्पष्ट संदेश है।
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली में प्रेसवार्ता कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार वीआईपी के नाम को जानबूझकर छुपा रही है और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि मांग न माने जाने पर प्रदेशभर में आंदोलन होगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए वीआईपी का राग अलाप रही है। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन डीजीपी ने सार्वजनिक अपील की थी कि यदि किसी को वीआईपी के बारे में जानकारी हो तो सामने आए, लेकिन तब भी कोई नाम नहीं बताया गया।
भट्ट ने आरोप लगाया कि अपुष्ट और छेड़छाड़ वाले वायरल वीडियो के जरिए कांग्रेस अंकिता के नाम पर राजनीति कर रही है, जो उस बिटिया की आत्मा का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस से बिना पुष्टि आरोप लगाने पर माफी मांगने की मांग की।
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी ने हत्या से पहले अपने मित्र को बताया था कि रिजॉर्ट में एक बड़े वीआईपी के लिए उस पर अतिरिक्त सेवाओं का दबाव बनाया जा रहा था। यही दावा आज भी इस मामले का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है, जिस पर राजनीति अब और तेज हो गई है।













