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ज्वाला देवी’ मंदिर में जल रही ‘ज्वाला’ का क्या है रहस्य?

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ज्वाला देवी मंदिर

 

ज्वाला देवी मंदिर-यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित हैं. इस मंदिर में अनंत काल से ज्वाला जल रही हैं.
यह मंदिर भारत में स्थित 51 शक्तिपीठ में से एक हैं.
यहाँ पर माता सती की जीभ गिरी थी. मंदिर प्रांगण में “गोरख डिब्बी” नाम की जगह हैं,
जो कि एक जल कुंड हैं.
इस कुंड में गर्म खोलता हुआ पानी हैं, जबकि कुंद का पानी चूने पर ठंडा लगता हैं.

ज्वाला देवी मंदिर कहते हैं कि मुगल आक्रान्ता* अकबर ने ली माता की परीक्षा लेने या अन्य किसी प्रकार की नियत से उस स्थान को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया। सबसे पहले उसने पूरे मंदिर में अपनी सेना से पानी डलवाया, लेकिन माता की ज्वाला नहीं बुझी। कहते हैं कि तब उसने एक नहर खुदवाकर पानी का रुख ज्वाला की ओर कर दिया लेकिन तब भी वह ज्वाला नहीं बुझी। तब जाकर अकबर को यकीन हुआ और उसने वहां सवा मन सोने का छत्र चढ़ाया लेकिन माता ने इसे स्वीकार नहीं किया और वह छत्र गिरकर किसी अन्य पदार्थ में परिवर्तित हो गया।
आप आज भी अकबर का चढ़ाया वह छत्र ज्वाला मंदिर में देख सकते हैं।

माँ ज्वाला देवी जय जय कर 

।।दोहा।।

शक्ति पीठ मां ज्वालपा धरूं तुम्हारा ध्यान ।

हृदय से सिमरन करूं दो भक्ति वरदान ।।

सुख वैभव सब दीजिए बनूं तिहारा दास ।

दया दृष्टि करो भगवती आपमें है विश्वास ।