
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में एक प्रशासनिक शिविर के दौरान भारी हिंसा की घटना सामने आई है। ‘बंदोबस्त जांच और रिकॉर्ड’ (SIR – Settlement Investigation & Record) की सुनवाई के लिए लगाए गए कैंप पर उग्र भीड़ ने अचानक हमला कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को अपनी जान बचाने के लिए कैंप छोड़कर भागना पड़ा।
सुनवाई के दौरान भड़का आक्रोश
जानकारी के मुताबिक, यह शिविर भूमि रिकॉर्ड, बंदोबस्त और सीमा विवादों के निपटारे के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। सुनवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड में कथित विसंगतियों और लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर विरोध जताना शुरू किया। देखते ही देखते विरोध उग्र हो गया और भीड़ ने टेंट उखाड़ दिए। सरकारी फाइलें बिखेर दी गईं और लैपटॉप सहित अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाया गया।
अधिकारियों पर हमला, सुरक्षा घेरा टूटा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ में शामिल शरारती तत्वों ने अधिकारियों को घेरकर धक्का-मुक्की और मारपीट की। मौके पर मौजूद पुलिस बल संख्या में कम होने के कारण स्थिति को तुरंत काबू में नहीं कर सका। हालात बिगड़ते देख प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) और राजस्व विभाग की टीम को पास के सुरक्षित स्थान पर शरण लेनी पड़ी। इस दौरान कुछ कर्मचारियों को मामूली चोटें भी आई हैं।
पुलिस की कार्रवाई, अतिरिक्त बल तैनात
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया और क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सरकारी कार्य में बाधा डालने और लोक सेवकों पर हमला करने के आरोप में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रशासन की सख्ती
इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं, जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी कामकाज में हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम लागू किए गए हैं और SIR की सुनवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है।












