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Saturday, January 17, 2026
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महाकुंभ के जरिए विश्व ने देखा भारत का विराट स्वरूप : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में महाकुंभ के आयोजन पर अपने विचार व्यक्त किए और इसके सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी लोगों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, “महाकुंभ की ऐतिहासिक सफलता में असंख्य लोगों का योगदान रहा है। मैं उन सभी कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूँ, जिनके अथक प्रयासों से यह आयोजन संभव हुआ। विशेष रूप से, मैं देशभर से आए श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश के नागरिकों और प्रयागराज की जनता को हृदय से धन्यवाद देता हूँ।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा ने हमें यह अनुभव कराया कि भारत आने वाले हजार वर्षों के लिए किस तरह तैयार हो रहा है। इसी तरह, इस वर्ष महाकुंभ ने हमारी सोच को और अधिक सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि “इतिहास में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जो कई पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते हैं। महाकुंभ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है।”

उन्होंने महाकुंभ में उमड़े श्रद्धालुओं के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि “लोगों ने सुविधा-असुविधा की परवाह किए बिना इसमें भाग लिया। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारी परंपराएं और संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते रहेंगे। आज का युवा अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व महसूस कर रहा है, और यही हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि महाकुंभ ने उन लोगों को भी जवाब दे दिया है जो इसकी प्रासंगिकता पर प्रश्न उठाते रहे हैं। “देश के हर कोने में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ है। महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह ‘सबका प्रयास’ का जीवंत उदाहरण है, जहाँ पूरी दुनिया ने भारत की विराट सांस्कृतिक धरोहर को देखा और सराहा।”

उन्होंने इस आयोजन को ऐतिहासिक क्षण करार देते हुए कहा कि “जिस प्रकार गंगा को धरती पर लाने के लिए भगीरथ ने महाप्रयास किया था, उसी प्रकार महाकुंभ के सफल आयोजन में अनगिनत लोगों की मेहनत और समर्पण झलकता है। यह भारत के सामर्थ्य और एकता का अमृत लेकर आया है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘सबका प्रयास’ के महत्व को दोहराते हुए कहा कि “हमने लाल किले से इस मंत्र को दोहराया था और महाकुंभ के माध्यम से पूरी दुनिया ने इसे साक्षात देखा। महाकुंभ केवल एक मेला नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, हमारी आस्था और हमारे सामूहिक प्रयासों का भव्य प्रतिबिंब है।”

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