
देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर के इतिहास में एक ऐसा भयावह अध्याय भी दर्ज है, जिसे याद कर आज भी पुराने शहरवासी सिहर उठते हैं। करीब तीन दशक पहले हुए ‘जल कांड’ की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है, जब नगर निगम की एक पानी की टंकी से सप्लाई हो रहे दूषित पानी ने इलाके में मौत का तांडव मचा दिया था।
दुर्गंध से शुरू हुई मौत की कहानी
यह घटना लगभग 30 साल पुरानी है। शहर के एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में लोगों ने नलों से आ रहे पानी में अजीब दुर्गंध और बदले हुए स्वाद की शिकायत की थी। शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन जल्द ही इलाके के अस्पतालों में उल्टी-दस्त, संक्रमण और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने लगी।
पहले हैजा, फिर मचा हड़कंप
प्रारंभिक जांच में स्वास्थ्य विभाग ने इसे सामान्य हैजा मानकर इलाज शुरू किया। लेकिन जब मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने लगा, तब प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। कुछ ही दिनों में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए।
टंकी की जांच में खुला खौफनाक सच
जब नगर निगम की टीम ने क्षेत्रीय पानी की टंकी की जांच की, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी दंग रह गए। टंकी के भीतर एक सड़ी-गली मानव लाश तैरती हुई मिली। शव काफी पुराना हो चुका था, जिससे पूरी टंकी का पानी जहरीला बन गया था। यही पानी बिना किसी जांच के सीधे घरों तक सप्लाई किया जा रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस हृदयविदारक घटना ने तत्कालीन प्रशासन और नगर निगम की लापरवाह सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया। जांच में सामने आया कि टंकी का ढक्कन या तो खुला हुआ था या आसानी से पहुंच में था, जिससे यह हादसा संभव हुआ।
घटना के बाद बदले नियम
इस त्रासदी के बाद राज्यभर में पानी की टंकियों की सुरक्षा, नियमित सफाई और ढक्कनों को सील-बंद रखने के सख्त निर्देश जारी किए गए। इसे नगर निगमों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा गया, ताकि भविष्य में ऐसी भयावह घटना दोबारा न हो।













