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Monday, January 19, 2026
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SIR पर बढ़ा विवाद, तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी – स्टालिन बोले, यह संघीय ढांचे पर हमला

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तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा यह विशेष पुनरीक्षण अभियान राज्य के अधिकारों में दखल है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार को चुनाव आयोग की इस पहल पर गंभीर आपत्ति है, क्योंकि यह प्रक्रिया “एकतरफा और गैर-पारदर्शी” तरीके से की जा रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है, लेकिन इस बार इसे “विशेष अभियान” के रूप में केंद्र सरकार के दबाव में चलाया जा रहा है, जो संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा, हम किसी भी संस्था के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन राज्य के अधिकारों और नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। यह कदम केवल तमिलनाडु सरकार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संघीय ढांचे की रक्षा का प्रतीक है।

इससे पहले, राज्य सरकार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से इस विशेष पुनरीक्षण अभियान पर रोक लगाने और स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगने की अपील की थी। सरकार का कहना है कि यह अभियान आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकता है और मतदाता सूची में मनमाने ढंग से नाम जोड़े या हटाए जाने का खतरा है।

वहीं, विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख को राजनीतिक नाटक करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह कदम केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया है। जबकि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का दावा है कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि जनता के मतदान अधिकारों की सुरक्षा की है।

राज्य निर्वाचन कार्यालय ने अपने बयान में कहा है कि विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम पूरी पारदर्शिता के साथ और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रह जाए।

इस विवाद ने तमिलनाडु की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले राज्य और केंद्र के बीच टकराव का नया अध्याय साबित हो सकता है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्टालिन अन्य विपक्षी शासित राज्यों से भी इस मुद्दे पर संवैधानिक सहयोग की अपील कर सकते हैं।