
भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत INS महेंद्रगिरि पर स्वदेशी रूप से निर्मित ‘सुपर रैपिड गन माउंट’ (SRGM) को सफलतापूर्वक तैनात कर दिया गया है। इस हथियार के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सामरिक स्थिति और अधिक सशक्त हो गई है।
35 किलोमीटर तक दुश्मन पर अचूक वार
सुपर रैपिड गन की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी मारक दूरी और सटीक निशाना है। यह गन 35 किलोमीटर तक दुश्मन के लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल समुद्री जहाजों के साथ-साथ हवा में उड़ने वाली मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने के लिए भी किया जा सकता है। इसकी तेज फायरिंग क्षमता आधुनिक नौसैनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
यह गन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई है और इसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BHEL द्वारा किया गया है। इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम और रडार लगे हैं, जिससे यह दिन-रात और हर मौसम में प्रभावी ढंग से काम कर सकती है। INS महेंद्रगिरि पर इसकी तैनाती भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाती है।
प्रोजेक्ट 17A का अहम युद्धपोत
INS महेंद्रगिरि, प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाया गया सातवां और अंतिम स्टेल्थ फ्रिगेट है। इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। स्टेल्थ तकनीक के कारण यह दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम है। सुपर रैपिड गन की तैनाती के बाद इसकी युद्ध क्षमता और भी बढ़ गई है।
सामरिक दृष्टि से बेहद अहम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में बदलते सुरक्षा हालात और बढ़ती चुनौतियों के बीच ऐसे आधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोत भारत की रणनीतिक बढ़त को मजबूत करते हैं। INS महेंद्रगिरि अब न केवल समुद्री सीमाओं की रक्षा करेगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने में भी सक्षम होगा।
भारतीय नौसेना के बेड़े में सुपर रैपिड गन का शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।













