वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का सफल ट्रायल, 180 किमी/घंटा की रफ्तार पर भी दिखी ‘सुपर स्टेबिलिटी’

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भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने अपने हालिया ट्रायल रन में न केवल तेज़ रफ्तार का प्रदर्शन किया, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, आराम और स्थिरता के मामले में भी नए मानक स्थापित कर दिए हैं। ट्रायल के दौरान यह ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड पर दौड़ी, फिर भी इसके कोचों में कंपन लगभग नगण्य रहा।

180 की स्पीड पर भी नहीं हिला पानी से भरा गिलास

ट्रायल के दौरान ट्रेन की स्थिरता को परखने के लिए एक अनोखा परीक्षण किया गया। कोच के भीतर एक मेज पर एक गिलास के ऊपर दूसरा गिलास रखकर उनमें पानी भरा गया। हैरानी की बात यह रही कि जब ट्रेन 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी, तब भी गिलास अपनी जगह से नहीं हिले और पानी की एक बूंद तक नहीं गिरी। यह परीक्षण ट्रेन की अत्याधुनिक सस्पेंशन प्रणाली और विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग का प्रमाण माना जा रहा है।

रफ्तार के साथ सुरक्षा का मजबूत कवच

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर संस्करण को मौजूदा चेयर कार संस्करण से कहीं अधिक उन्नत बनाया गया है। इसमें कई आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं—

  • कवच सुरक्षा प्रणाली: स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह सिस्टम ट्रेनों की टक्कर रोकने में सक्षम है।
  • सेंसर आधारित ऑटोमैटिक दरवाजे: यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाए गए हैं।
  • आधुनिक अग्निशमन प्रणाली: कोचों में फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम मौजूद है।

हवाई जहाज जैसा अनुभव, लग्जरी सुविधाओं से लैस

लंबी दूरी की यात्राओं को आरामदायक बनाने के उद्देश्य से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसके इंटीरियर को लक्ज़री होटल और विमान के अनुभव जैसा बनाया गया है—

  • आरामदायक स्लीपर बर्थ: बेहतर कुशनिंग के साथ, जिससे लंबी यात्रा में थकान न हो।
  • बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स: टच-फ्री और स्वच्छता पर विशेष ध्यान।
  • रीडिंग लाइट और चार्जिंग पॉइंट्स: हर बर्थ पर मोबाइल चार्जिंग और पढ़ने की सुविधा।

जल्द आम यात्रियों के लिए दौड़ेगी ट्रेन

सफल ट्रायल के बाद अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को कमर्शियल ऑपरेशन की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रेल मंत्रालय की योजना है कि इसे राजधानी एक्सप्रेस जैसे प्रमुख रूटों पर चलाया जाए, ताकि यात्री कम समय में अधिक आराम के साथ यात्रा कर सकें।

रेल मंत्री ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम को बधाई देते हुए इसे ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता करार दिया है।