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Saturday, February 14, 2026
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सबरीमाला विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को बड़ी बेंच भेजा 

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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विवाद भी दशकों पुराना है वजह यह है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी माने जाते हैं और ‘रजस्वला’ उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की मांग रही है मंदिर करीब 800 साल से अस्तित्व में है, इस मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश देने का मामला फिलहाल लटक गया है ।

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने अपने फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं को गुरुवार को बड़ी बेंच को भेज दिया। 3 जजों ने बहुमत से मामले को 7 जजों की संविधान पीठ को रेफर किया है जबकि 2 जजों- जस्टिस नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसके खिलाफ अपना निर्णय दिया। CJI रंजन गोगोई ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं को सार्वजनिक आदेश, नैतिकता और भाग-3 के अन्य प्रावधानों के खिलाफ नहीं होना चाहिए।

 क्या कहा कोर्ट ने ?

चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि याचिकाकर्ता इस बहस को पुनर्जीवित करना चाहता है कि धर्म का अभिन्न अंग क्या है? पूजा स्थलों में महिलाओं का प्रवेश सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है। मस्जिदों में भी महिलाओं का प्रवेश शामिल है । सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि महिलाओं के प्रवेश का पिछला फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा। केरल सरकार को कहा गया है कि वह इसे लागू करने पर फैसला ले।

केरल में भारी सुरक्षा इंतजाम

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने, 28 सितंबर, 2018 को SC के फैसले पर हिंसक विरोध के बाद 56 पुनर्विचार याचिकाओं सहित कुल 65 याचिकाओं पर यह फैसला लिया है। संविधान पीठ ने इन याचिकाओं पर इस साल 6 फरवरी को सुनवाई पूरी की थी और कहा था कि इन पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। फैसले से पहले ही केरल में हाई अलर्ट था। केरल पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। पूजा फेस्टिवल के लिए सबरीमाला के आसपास 10 हजार जवानों की तैनाती की गई है। 307 महिला पुलिस भी सुरक्षा संभाल रही हैं।

पहले क्या था कोर्ट का फैसला

28 सितंबर, 2018 को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने संबंधी व्यवस्था को असंवैधानिक और लैंगिक तौर पर पक्षपातपूर्ण करार देते हुए 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था। गौरतलब है कि इस पीठ की एकमात्र महिला सदस्य जस्टिस इन्दु मल्होत्रा ने अल्पमत का फैसला सुनाया था।

जानिये सबरीमाला मंदिर के बारे में

सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल से अस्तित्व में है,केरल के पठनामथिट्टा जिले की पहाड़ियों के बीच भगवान अयप्पा का मंदिर है, जिसे सबरीमाला मंदिर के नाम से जानते हैं। जिले में पेरियार टाइगर रिजर्व भी है, जिसकी 56.40 हेक्टेयर जमीन सबरीमाला को मिली हुई है।  मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पावन सीढ़ियों को पार करना पड़ता है, जिनके अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं। इस मंदिर में हर साल नवंबर से जनवरी तक, श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए आते हैं क्योंकि बाकी पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है। मकर संक्रांति के अलावा यहां 17 नवंबर को मंडलम मकर विलक्कू उत्सव मनाया जाता है।

यहाँ महिलाओं को क्यों नही जाने दिया जाता

सबरीमाला मंदिर महिलाओं के प्रवेश पर विवाद भी दशकों पुराना है, इस मदिंर में ऐसी महिलाओं को जाने पर पाबंदी है जो माँ बन सकती हैं । माना जाता है कि 10 से 50 साल तक कि महिलाएँ पीरियड्स होने की वजह से शुद्ध नहीं रह सकतीं और भगवान के पास बिना शुद्ध हुए नहीं आया जा सकता । कहा जाता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं और महिलाओं को प्रवेश इसी वजह से नही दिया जाता ।