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Friday, January 16, 2026
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Home news 1 मिनट में सुलझ सकता है मंदिर मामला

1 मिनट में सुलझ सकता है मंदिर मामला

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आयोध्या विवाद : रामलला के पक्षकार महंत धर्मदास और बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी से हमारी सहयोगी चैनल एक्सपोज इण्डिया की अनन्य बातचीत।

मुखय प्रबन्ध सम्पादक देवनाथ से महंत धर्मदास/इकबाल अंसारी ने बेवाकी से कहा-

पहला सवाल धर्मदास से-

धर्मसभा के क्या कोई राजनीतिक मायने हैं?

इसे धर्मसभा नहीं कहते। विश्व हिंदू परिषद जो 25 साल से मृतप्राय हो चुकी थी वह अपनी आयु बढ़ाने के लिए आक्सीजन ले रही थी। विहिप की धर्मसभा विहिप के कमाने-धमाने का जुगाड़ था। इनका न तो राम जी से लेना-देना है और न ही लक्ष्मण से लेना-देना है।

आप प्रमुख पक्षकार हैं। अगर जल्द सुनवाई नहीं होती तो आप क्या करेंगें?

मैं राष्ट्रपति से मिलूंगा, प्रधानमंत्री से मिलूंगा, लोकसभा अध्यक्ष से मिलूंगा। उसके बाद तय करूंगा कि मुझे क्या करना है।

पीएम मोदी मंदिर निर्माण में अवरोध के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आप क्या सोचते हैं?

कांग्रेस ने जो किया सो किया। अब तो सबसे बड़ा अवरोध किया है मुख्य न्यायाधीश ने, जिस प्रकार का आचरण किया है वह मुझे अच्छा नही लगा। मैं उस समय कोर्ट रूम में मौजूद था। मुख्य न्यायाधीश ने मंदिर कि फाइल फेंक दी थी और बोला था कि इसे हटाओं, ये जरूरी नही है, इसे जनवरी-फरवरी में दें लेंगें। यह महत्वपूर्ण केस नही है। इससे मुझे बहुत कष्ट हुआ। मैं चाहता हूं कि आयोध्या केस से मुख्य न्यायाधीश को हटाया जाए। हम दोनो पक्षों ने दरख्वास्त लिख कर दे दिया है।

आपको क्या लगता है कि जजों पर कोई दबाव था कि इस केस को अभी टाल दिया जाए?

सुप्रीम कोर्ट के जज बनाने की जो प्रक्रिया है वह ठीक नहीं है। जो प्रक्रिया है वह दरअसल कचरा है। जब लोवर कोर्ट में परीक्षा से जज बनाते हैं तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति परीक्षा से क्यों नहीं होती। दरअसल कोई चाहता ही नही कानून का राज सुदृढ़ रहे।

आप के कहने का तात्पर्य यह है कि जो मुख्य न्यायाधीश आपका केस देख रहे हैं अगर वे कोई फैसला देते हैं तो वह आपको मान्य नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश किसी धारणा से ग्रस्त हैं। चाहे कम्युनिस्ट धारणा से ग्रस्त हों या कांग्रेस धारणा से ग्रस्त हों अथवा इनका मानसिक संतुलन खत्म हो गया हो यही मुझे समझ में आता है। अगर किसी के प्रति आपकी मानसिक घृणा बन गई तो भी तो एक प्रकार का रोग है।

इकबाल अंसारी से सवाल :- क्या आप भी मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से किसी मानसिकता से ग्रस्त हैं?

इकबाल अंसारी :- नहीं..देखिए ऐसा है कि हम एक पक्षकार हैं, महराज भी एक पक्षकार हैं। हम कोर्ट से अलग नहीं जा सकते। कोर्ट जो कहेगा हम उसे मानेंगें। क्योंकि संविधान हमारा है और हम हिन्दुस्तान के हैं। हम संविधान का सम्मान करेंगें। जो कोर्ट कहेगा वही मानेंगें।

न्यायाधीश किसी मानसिकता से ग्रस्त हैं। तो न्याय कैसे मिलेगा?

देखिए! महाराज जी ने कहा है ऐसा नहीं है। जो भी कोर्ट कहेगा महाराज जी भी मानेंगे

अयोध्या में विहिप की जो धर्मसभा हुई उस पर इकबाल अंसारी क्या कहेंगे?

अयोध्या में धर्मसभा एक धार्मिक कार्यक्रम था। संत का काम है पूजा पाठ, संत का कार्य है धर्म का प्रचार करना। धर्मसभा में जो धार्मिक बातें हुई उससे हम सहमत हैं। हम किसी को गलत नहीं कहेंगे क्योंकि वे सभी धार्मिक संत हैं।

जिस तरह से दबाव बनाया जा रहा है उससे आपको लगता है कि मंदिर निर्माण तो होकर रहेगा?

कोई दबाव नहीं है। कोर्ट अपना काम करेगा। हमने 15 दिन पहले राष्ट्रपति को अपना ज्ञापन दिया है कि इसकी सुनवाई हो। जो कोर्ट कहेगा हम उसे मानेंगे।

आपने अपनी जान का खतरा बताया था? आपको कौन मारना चाहता है?

खतरा किससे है यह जान जाएं तो वह तुरन्त गिर तार न हो जाए। खतरा सबको होता है चाहे प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री हों।

आपको खतरा है क्या?

जब नेता इतनी भीड़ बुलाते हैं और भीड़ को नियंत्रित करने वाला कोई नहीं होता तो खतरा बढ़ जाता है। हमने सरकार से कहा और सरकार ने सुरक्षा दे दी।

धर्मसभा के दिन 6 दिसंबर जैसी घटना भी आशंका थी आपको?

जिस तरह से 25 व 26 नवम्बर का दिन गुजरा है हर आदमी डरा हुआ था, चाहे वह हिन्दू हो अथवा मुसलमान। इतनी भीड़ होती है तो क्या हिन्दू नहीं डरता? अयोध्या की भीड़ मे क्या हिन्दू नहीं मारे गए?

आप इस वक्त इकबाल अंसारी के घर पर हैं, दोनों एक-दूसरे के साथ बैठते हैं फिर कोई रास्ता क्यों नहीं निकलता? कोर्ट के बाहर ही क्यों नहीं तय कर लेते आप दोनों?

उत्तर: (महंत धर्मदास) – कोर्ट के बाहर हम अभी तय कर लें। एक सेकण्ड, मिनट या एक दिन में तय कर लेंगे लेकिन हमारी बात कोई मानेगा? यहां का जिला जज मानेगा? मानेगा तो सिर्फ मुख्य नयायधीश हमारी बात समझिएगा, कोर्ट मानेगा, कोर्ट में एक वकील रहता है, एक एआरओ रहता है… यहां करिए …वहां करिए…..।

सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि इस मुद्दे पर बाहर कोर्ट के बाहर सहमति तो अच्छा होता?

सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कहा था। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने किसको नियुक्त किया कि जाइए सुलह की बात कीजिए। अभी तो 50 ग्राहक आ जाएंगे। कोर्ट को किसी को नियुक्त करना चाहिए था। कहने भर से नहीं होता, अब कौन किस से कहेगा कि आओ सुलह करें। यहां के जिलाधिकारी को ही कह देता सुप्रीम कोर्ट। चाहे जिला जज को कहते कि आप सुलह कराओ। यहां आते हैं दो जज 15 दिन में एक बार। आएंगे चाय पिएंगे, खाएंगे, घूमेंगे चले जाएंगे, लेकिन उस विषय पर चर्चा नहीं करेंगे।

वह कौन है जो राम मंदिर के निर्माण में रोड़ा अटकाना चाहता है? मंदिर निर्माण का सबसे बड़ा रोड़ा है क्या?

राममंदिर के निर्माण का सबसे बड़ा रोड़ा कोर्ट है। कोर्ट बिना किसी व्यवस्था के हमें दौड़ा रहा है। एक छोटी सी चीज़ कि(अयोध्या) किसका है उसके लिए 10,000 पेज का आर्डर दे दिया। खुदाई की व्यवस्था देखा तो मोहनजोदड़ो से लेकर पूरी सभ्यता पर ही बात करने लगा।

इकबाल जी जब आप दोनों पक्षकार एक साथ बैठकर आत्मीयता से बात कर लेते हैं तो क्यों नहीं कोई रास्ता निकल रहा है मंदिर का?

उत्तर : (इकबाल) ये मामला पुराना है। जब हम छोटे थे उसके पहले से चल रहा है, यह मामला राजनीति के चंगुल में है। चंपतराय ने कहा कि हम एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेंगे। 72 एकड़ की जमीन है, एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेंगे तो कौन सहमत होगा।

चंपतराय पक्षकार तो हैं नहीं। फिर उनकी बात क्यों सुन रहें हैं? आप दोनों तय कीजिए?

अगर इसमें राजनीति नहीं होती तो अब तक फैसला हो गया होता।

आप बड़ा दिल क्यों नहीं दिखाते?

बड़ा दिल कोर्ट के पास है। हम साफ कह रहे हैं कि कोर्ट जो कहेगा हम वह मानेगें। कोर्ट पर हमें भरोसा है।

प्रश्न : ( महंत धर्मदास से) आप क्या चाहते हैं?

जज को बदल दीजिए। उस जज ने आनास्था जाहिर की है न कि कोर्ट ने। इस लिए जज बदलना चाहिए। उस जज से हमारा केस न दिखाया जाए। हमारी मांग विधि सम्मत है।

(इकबाल से ) आप सहमत हैं कि जज बदल दिए जाएं।

महाराज जी की सोच अलग है और हमारी सोच अलग है।

सोच तो आप दोनों की मिलती जुलती है?

हम लोग प्रतिद्वंद्वी हैं। इस तरह से हम लोग मीडिया में नहीं कह सकते। इसलिए हम आपसे कह देगें तो आप की समझ में नहीं आएगा।

( महंत धर्मदास से) अगर विहिप धर्मसभा के जरिए मंदिर निर्माण करना चाहती है तो इसमें गलत क्या है

कोई काम शु़द्ध हृदय से शुद्ध विचार से करना गलत नहीं है। ये लोग भी राम मंदिर निर्माण के लिए ही आ रहें हैं तो गलत कह ही नहीं सकते। लेकिन जो व्यवस्था देख रहे हैं उसमें चंपतराय और त्रिलोकी जैसे दो चार लोग हैं जो व्यवस्था की विफलता चाहतें हैं।

आप के जीवनकाल में राम मंदिर बनेगा क्या ?

जीवनकाल को छोड़िए। मंदिर बनने जा रहा है। आप से बताना चाहता हूं कि ये हनुमान का काम है- हमें अपने देवता पर विश्वास है। उनका आशीर्वाद है कि जल्द से जल्द राम मंदिर बनेगा।

(इकबाल से ) एक राजनेतिक दल ने कह है कि यहां वह लाखों लोगों को लेकर आएंगे और मस्जिद बनाएंगे। आप क्या कहेंगे?

कौन क्या कह रहा है यह हमें नही मालूम। हम लोगों से यही कह सकते हैं कि हम धर्म की राजनीति नहीं करते। किसी के कहने से कुछ नहीं होता।

औवेसी तो कुछ और कहते हैं ?

औवेसी को हम नहीं जानते हैं।

आप जानते हैं विनय कटियार जैसे लोगों को क्या?

(महंत धर्मदास)-विनय तो हमारा ही चेला है। छंटुआ नेता हैं। इसलिए जब छंट जाता है तो उलूल-जलूल बोलता है।

(इकबाल से) मंदिर बन जायेगा क्या ?

हमारा और महाराज जी का संबंध बहुत पुराना है। 25 वर्षो से अधिक का हमारा साथ है। हमारा संबंध जन्मभूमि के पुजारी से भी है। अयोध्या में ऐसे सैकड़ों संत हैं जिनका सम्मान हम करतें हैं और वह हमारा सम्मान करते हैं।