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Saturday, February 14, 2026
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स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर उठा सवाल, राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने पर कांग्रेस ने दी सफाई

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संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नया विवाद सामने आया था। इस प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर भाजपा ने सवाल खड़े किए और इसे विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ में फूट से जोड़कर पेश किया। अब कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष साफ किया है।

कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने के पीछे कोई राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि तय संसदीय प्रक्रिया और रणनीति है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए न्यूनतम 50 सांसदों के हस्ताक्षर पहले ही पूरे हो चुके थे, ऐसे में राहुल गांधी का हस्ताक्षर होना अनिवार्य नहीं था। यह प्रस्ताव पूरे विपक्ष की ओर से सामूहिक रूप से लाया गया है।

कांग्रेस की रणनीति और प्रक्रिया पर जोर

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं और वे हस्ताक्षर करने के बजाय सदन में इस प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा का नेतृत्व करेंगे। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उनके हस्ताक्षर न होने से प्रस्ताव की वैधानिकता पर कोई असर नहीं पड़ता। प्रस्ताव पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी नेताओं सहित कई विपक्षी दलों के प्रमुख सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जो गठबंधन की एकजुटता को दिखाते हैं।

राहुल गांधी का नाम सूची में न होने पर भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि या तो वे खुद प्रस्ताव को लेकर आश्वस्त नहीं हैं या फिर उन्हें गठबंधन का पूरा समर्थन नहीं मिल रहा। इसके जवाब में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और स्पीकर के कथित एकतरफा रवैये के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।

विपक्षी दलों टीएमसी, डीएमके और शिवसेना (यूबीटी) ने भी राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पूरी रणनीति और सहमति के साथ लाया गया है।

विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष विपक्षी सांसदों को बोलने का पूरा मौका नहीं दे रहे हैं, उनके माइक बंद किए जाते हैं और नियमों का इस्तेमाल चुनिंदा तौर पर किया जाता है। साथ ही हाल के दिनों में बड़ी संख्या में सांसदों के निलंबन को भी अविश्वास प्रस्ताव लाने की एक बड़ी वजह बताया गया है।