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Tuesday, March 10, 2026
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जीएसटी प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी, 20 जून को वित्त मंत्री की अहम बैठक

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 जून को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करने जा रही हैं। यह बैठक आगामी जीएसटी परिषद की बैठक की नींव मानी जा रही है, जिसमें दरों के पुनर्गठन, इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया में सुधार और क्षतिपूर्ति सेस के भविष्य पर अहम फैसले हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार जीएसटी के 12% वाले टैक्स स्लैब को समाप्त करने पर विचार कर रही है। इस श्रेणी की वस्तुओं को 5% या 18% स्लैब में समायोजित किया जा सकता है। इसका उद्देश्य जीएसटी प्रणाली को अधिक सरल और तार्किक बनाना है। फिलहाल जीएसटी के तहत 3%, 5%, 12%, 18% और 28% की पांच अलग-अलग दरें लागू हैं।

बैठक में जीएसटी संग्रह की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित दरों में बदलाव से राजस्व पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा की जाएगी। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बदलाव से राजस्व में गिरावट न आए। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में ही मासिक जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के पार रहा है।

बैठक के एजेंडे में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिफंड से जुड़ी जटिलताओं को भी शामिल किया गया है। मौजूदा नियमों के तहत यदि खरीदार ने अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो विक्रेता को ITC का लाभ नहीं मिलता। इस व्यवस्था को सरल और व्यावहारिक बनाने पर विचार किया जा रहा है।

इस बैठक में मार्च 2026 में समाप्त होने जा रहे क्षतिपूर्ति सेस की वैधता और भविष्य को लेकर भी चर्चा होगी। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नेतृत्व में गठित समूह 30 जून तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

पिछले छह महीनों से जीएसटी परिषद की कोई बैठक नहीं हुई है, जबकि सामान्य तौर पर हर तीन महीने में बैठक होती है। पिछली बैठक दिसंबर 2024 में हुई थी, जिसमें दरों की समीक्षा के लिए मंत्रियों का एक समूह गठित किया गया था। अब 20 जून की बैठक के बाद परिषद की अगली बैठक जल्द बुलाई जा सकती है।

जीएसटी प्रणाली में प्रस्तावित यह बदलाव व्यापारियों, उपभोक्ताओं और सरकार सभी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। 20 जून की बैठक के नतीजे इस दिशा में आने वाले बड़े फैसलों की आधारशिला रखेंगे।