
कर्ज के सहारे अर्थव्यवस्था चला रहे पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अब देश में दवाओं की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ रहा है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी के बोहर बाजार समेत कई इलाकों में दवाओं की कीमतों में 50% से लेकर 500% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जरूरी दवाएं हुईं महंगी
कीमतों में बढ़ोतरी का असर डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, पेट की बीमारियों और खांसी की दवाओं पर साफ दिख रहा है। इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत 2,200 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 4,720 रुपये तक पहुंच गई है।
इसके अलावा विटामिन B सप्लीमेंट्स, बदहजमी और एसिडिटी की दवाएं, न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स और थायरॉइड की दवाओं के दाम भी कई गुना बढ़ गए हैं। कई जीवन रक्षक दवाएं अब आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
अचानक हुई इस भारी बढ़ोतरी से लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। नागरिक संगठनों ने इसे “असहनीय” बताते हुए सरकार से तुरंत दखल देने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर दवाओं के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो कम आय वाले मरीज जरूरी इलाज से वंचित हो जाएंगे।
LPG संकट ने बढ़ाई परेशानी
दवाओं की महंगाई के साथ-साथ देश में LPG संकट भी गहराता जा रहा है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, 11.67 किलोग्राम का LPG सिलेंडर 5,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है।
खासतौर पर पंजाब प्रांत के कई शहरों में कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गैस के दाम बढ़ने से LPG से चलने वाले वाहनों का किराया भी बढ़ गया है, जिससे आम लोगों के लिए यात्रा करना महंगा हो गया है।
आम जनता पर दोहरी मार
दवाओं और गैस की कीमतों में एक साथ हुई बढ़ोतरी ने पाकिस्तान की आम जनता पर दोहरी मार डाली है। महंगाई के इस दौर में स्वास्थ्य सेवाएं और दैनिक जरूरतें दोनों ही महंगी होती जा रही हैं, जिससे आर्थिक संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।













