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राजनाथ सिंह ने वर्ष 1971 के युद्ध को भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय करार दिया

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नई दिल्ली-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘स्वर्णिम विजय दिवस’ के मौके पर 1971 के युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों के अदम्य साहस एवं बलिदान को याद किया।

रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने 16 दिसंबर 2021 को ‘स्वर्णिम विजय दिवस’ के मौके पर राष्ट्र के साथ 1971 के युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों के साहस, वीरता एवं बलिदान को राष्ट्र के साथ याद किया। अपने अनेक ट्वीट् संदेश में रक्षा मंत्री ने 1971 के युद्ध को भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय करार दिया।
राजनाथ सिंह ने 1971 के युद्ध की कुछ पुरानी व महत्वपूर्ण तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें समर्पण के समय तैयार किये गए दस्तावेज की तस्वीर भी शामिल है।

1971 के युद्ध में भारत की जीत के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्वर्णिम विजय वर्ष मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उस युद्ध में शामिल होने वाले दिग्गजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के अलावा, सामान्य रूप से जनता और विशेष रूप से सशस्त्र बलों के बीच सामंजस्य, राष्ट्रवाद तथा गौरव का संदेश प्रसारित करना है।

 

प्रधानमंत्री ने 50वें विजय दिवस के अवसर पर मुक्तिजोद्धाओं, बीरांगनाओं और भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य तथा बलिदान को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 50वें विजय दिवस के अवसर मुक्तिजोद्धाओं, बीरांगनाओं और भारतीय सशस्त्र बलों के जांबाजों के अदम्य शौर्य तथा बलिदान को याद किया। श्री मोदी ने कहा कि इस अवसर पर राष्ट्रपति जी की ढाका में उपस्थिति हर भारतीय के लिये विशेष महत्त्व रखती है।
एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा हैः
“50वें विजय दिवस के अवसर पर मैं मुक्तिजोद्धाओं, बीरांगनाओं और भारतीय सशस्त्र बलों के जांबाजों के अदम्य शौर्य तथा बलिदान को याद करता हूं। हमने मिलकर दमनकारी ताकतों का मुकाबला किया और उन्हें पराजित किया। राष्ट्रपति जी की ढाका में उपस्थिति हर भारतीय के लिये विशेष महत्त्व रखती है।”

 

1971 का भारत-पाक युद्ध, जिसे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम भी कहा जाता है उसमें पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों को  जीत मिली थी। इस उपलक्ष्य में हर साल 16 दिसंबर को भारत में विजय दिवस मनाया जाता है। आज जब बांग्लादेश अपनी आजादी का 50वां साल मना रहा है, तब भारतीय सैनिकों की शहादत और संघर्ष की यादें फिर ताजा हो गई हैं।
प्रत्येक राष्ट्र के इतिहास में ऐसे अवसर आते हैं जो राष्ट्र  को एकजुटता और गौरव की भावना से भर देते हैं। 16 दिसंबर, 1971 भारत के आधुनिक इतिहास की ऐसी ही एक घटना थी,  जिस दिन हमारे सशस्त्र बलों ने एक अद्भुत उपलब्धि हासिल की। पूर्वी  पाकिस्तान को लंबे संघर्ष और पीड़ा से मुक्ति दिलाकर एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का निर्माण किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से एक तरफ जहां भारत ने अपने दुश्मन को परास्त किया गया वहीं दूसरी तरफ एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने को बेचैन पूर्वी पाकिस्तान को पाकिस्तान से अलग करके अपना भविष्य भी सुरक्षित किया।