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कला और संस्कृति को बढ़ावा देने और प्रसार करने के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही योजनाएं

संस्कृति मंत्रालय केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने, संरक्षित करने और इसे बचाये रखने के उद्देश्य से अनुसंधान, प्रलेखन, प्रसार आदि के माध्यम से एक वित्तीय अनुदान योजना लागू करता है, इस योजना के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों सहित स्वैच्छिक संगठनों को सांस्कृतिक विरासत पर अध्ययन व अनुसंधान, कला और संस्कृति के दृश्य कार्यक्रम तथा पारंपरिक एवं लोक कला प्रशिक्षण, पुरानी पांडुलिपियों, साहित्य, कला व शिल्प के संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों / संगीत तथा नृत्य जैसे कार्यक्रमों के प्रलेखन और ऑडियो के माध्यम से इनके प्रसार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही चल रही योजनाओं का विवरण इस प्रकार है

1. शताब्दी महोत्सव और वर्षगाँठ योजना।
2. कला संस्कृति विकास योजना।
3. संग्रहालय का विकास
4. पुस्तकालयों और अभिलेखागार का विकास।
5. वैश्विक जुड़ाव और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
6. पांडुलिपियों पर राष्ट्रीय मिशन।

मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही सभी अम्ब्रेला योजनाओं के उद्देश्य इस प्रकार हैं

(i) शताब्दी महोत्सव और वर्षगाँठ योजना: यह देश के लिए ऐतिहासिक महत्व की प्रतिष्ठित हस्तियों और घटनाओं की 125वीं/150वीं/175वीं आदि शताब्दी महोत्सव और विशेष वर्षगांठ मनाने के लिए है। स्मरणोत्सव 100/125/150 आदि वर्षों के पूरा होने पर शुरू होता है और एक वर्ष की अवधि तक जारी रहता है।
(ii) कला संस्कृति विकास योजना: नाटक, रंगमंच समूहों, नृत्य समूहों, संगीत कलाकारों, लोक रंगमंच और संगीत और प्रदर्शन कला गतिविधियों की अन्य शैलियों को वित्तीय सहायता प्रदान करके देश की कला और संस्कृति को बढ़ावा देना और प्रसारित करना इसका उद्देश्य है।
(iii) संग्रहालय का विकास: केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सोसायटियों, स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्थानीय निकायों और ट्रस्टों द्वारा सोसायटी अधिनियम के तहत क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर पंजीकृत नए संग्रहालयों की स्थापना और मौजूदा संग्रहालयों के सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण के लिए यह योजना है।
(iv) पुस्तकालयों और अभिलेखागार का विकास: राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन (एनएमएल) का उद्देश्य भारत का एक राष्ट्रीय वर्चुअल पुस्तकालय स्थापित करना, मॉडल पुस्तकालयों की स्थापना, पुस्तकालयों का मात्रात्मक/गुणात्मक सर्वेक्षण और क्षमता निर्माण करना है। सभी राष्ट्रीय,राज्य और जिला स्तर के पुस्तकालयों को मॉडल पुस्तकालयों के रूप में विकसित किया जाना है, इन पुस्तकालयों को आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में विकसित करने पर जोर दिया जाना है। इसके अलावा, राज्यों के जिला पुस्तकालयों को नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों के अनुसरण में पुस्तकालयों और सूचना सेवाओं का सतत विकास करना उद्देश्य है। साथ ही सभी पुस्तकालयों में सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) एप्लिकेशन को बढ़ावा देना पुस्तकालय प्रबंधन का आधुनिकीकरण, पुस्तकालयों और नागरिकों का एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण और प्रशिक्षण के माध्यम से पुस्तकालय पेशेवर क्षमताओं में सुधार करना है भी उद्देश्यों में शामिल है।
(v) वैश्विक जुड़ाव और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
.विदेशों में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना
.भारत के साथ अन्य देशों के संबंधों को मजबूत करना।
.द्विपक्षीय सांस्कृतिक संपर्कों को बढ़ावा देना
.विदेशों में भारत की सांस्कृतिक छवि को प्रोजेक्ट करना; तथा
.पर्यटन को बढ़ावा देना।
(vi) पांडुलिपियों पर राष्ट्रीय मिशन
.राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण के बाद पाण्डुलिपियों का पता लगाना।
.एक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के लिए प्रत्येक पांडुलिपि और पांडुलिपि भंडार का दस्तावेजीकरण करें, जिसमें वर्तमान .में चार मिलियन पांडुलिपियों की जानकारी है, जो इसे दुनिया में भारतीय पांडुलिपियों पर सबसे बड़ा डेटाबेस बनाता है।
.पाण्डुलिपियों का संरक्षण करना जिसमें पाण्डुलिपि संरक्षकों की एक नई पीढ़ी के संरक्षण और प्रशिक्षण के आधुनिक .और स्वदेशी दोनों तरीकों को शामिल किया गया है।
.अगली पीढ़ी के विद्वानों को पाण्डुलिपि अध्ययन के विभिन्न पहलुओं जैसे भाषाओं, लिपियों और आलोचनात्मक .संपादन और ग्रंथों के कैटलॉगिंग और पांडुलिपियों के संरक्षण में प्रशिक्षित करना।
.दुर्लभ पांडुलिपियों को डिजिटाइज़ करके पांडुलिपियों तक पहुंच को बढ़ावा देना।
.अप्रकाशित पांडुलिपियों और कैटलॉग के महत्वपूर्ण संस्करणों के प्रकाशन के माध्यम से पांडुलिपियों तक पहुंच को बढ़ावा देना।
.व्याख्यान, संगोष्ठियों, प्रकाशनों और अन्य आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से पांडुलिपियों के साथ जनता के जुड़ाव को सुविधाजनक बनाना। यह जानकारी आज लोकसभा में संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री जी.किशन रेड्डी ने दी।