मुंबई नगर निकाय ने तटीय सड़क परियोजना के और ज्यादा जमीन मांग रही है: न्यायालय को दी गयी जानकारी

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उच्चतम न्यायालय को मंगलवार को सूचित किया गया कि बृहनमुंबई नगर निगम मरीन ड्राइव क्षेत्र को बोरीवली से जोड़ने की 14 हजार करोड़ रूपए की तटीय सड़क परियोजना के लिये और ज्यादा भूमि की मांग करके शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन कर रही है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 17 दिसंबर को बीएमसी की परियोजना को मंजूरी देने के तटीय सड़क क्षेत्र के निर्णय को निरस्त करने के बंबई उच्च न्यायालय के जुलाई, 2019 के आदेश पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने यह भी कहा था कि बीएमसी सड़क निर्माण के लिये भूमि के लिये दावा करने के लिये स्वतंत्र है लेकिन वह शीर्ष अदालत के अगले आदेश तक कोई दूसरा विकास कार्य नहीं करेगी।

इस परियोजना के तहत दक्षिण मुंबई में मरीन ड्राइव इलाके को उत्तर के उपनगर बोरीवली से जोड़ा जायेगा।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ को इस परियोजना का विरोध करने वालों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सूचित किया कि सड़क निर्माण के लिये सिर्फ 22 एकड़ तटीय भूमि की आवश्यकता थी लेकिन अब इसके लिये 75 एकड़ भूमि की और मांग की जा रही है। महाराष्ट्र सरकार और उसके प्राधिकारियों की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस दलील का विरोध किया और कहा कि इस परियोजना के लिये आवश्यक न्यूनतम भूमि की ही मांग की जा रही है।

रोहतगी ने कहा , ‘‘क्या मैं समुद्र में खड़ा होकर सड़क का निर्माण करूंगा।’’ उन्होंने कहा कि तटीय सड़क निर्माण के लिये न्यूनतम सुविधाओं की आवश्यकता होगी। इस पर पीठ ने संबंधित पक्षों से कहा कि वे हलफनामा दाखिल कर बतायें कि क्या तटीय सड़क परियोजना के लिये 95 एकड़ भूमि की आवश्कयता है। न्यायालय ने इसके साथ ही इस मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। इस बीच, पीठ ने प्राधिकारियों से कहा कि निर्माण की गतिविधियों की वजह से मछुआरों की आजीविका को होने वाले नुकसान के पहलू पर भी विचार किया जाये।