
बच्चों में बढ़ती मोबाइल और सोशल मीडिया की लत पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सरकार स्मार्टफोन में अनिवार्य ‘माइनर मोड’ लागू करने की संभावना पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य नाबालिगों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल तैयार करना और उनके स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बच्चों के लिए अलग ‘माइनर प्रोफाइल’ उपलब्ध कराया जा सकता है। इसमें आयु सत्यापन, सीमित स्क्रीन टाइम, अभिभावकों की निगरानी (Parental Controls), सुरक्षित सर्च, आपत्तिजनक सामग्री पर रोक और सोशल मीडिया के कुछ फीचर्स तक सीमित पहुंच जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों और अत्यधिक मोबाइल उपयोग से बचाने में मदद मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को लेकर सरकार स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल सेवा प्रदाताओं के साथ चर्चा कर रही है। सरकार ऐसा ढांचा तैयार करना चाहती है, जिससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित हो और अभिभावकों को उनके डिजिटल उपयोग पर बेहतर नियंत्रण मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नींद और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसी वजह से कई देशों में पहले से ही बच्चों की डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विशेष नियम लागू हैं। भारत भी अब इसी दिशा में व्यापक नीति तैयार करने पर काम कर रहा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो स्मार्टफोन कंपनियों को अपने सभी नए उपकरणों में ‘माइनर मोड’ जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी पड़ सकती हैं। सरकार का मानना है कि तकनीक का सुरक्षित और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम बच्चों के हित में महत्वपूर्ण साबित होगा।











