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Thursday, April 2, 2026
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ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध के खिलाफ अमेरिका-यूरोप में लाखों लोग सड़कों पर

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ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिका और यूरोप के कई देशों में ‘नो किंग्स’ नाम से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतरकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, खासकर ईरान के साथ युद्ध और आक्रामक राजनीतिक रुख के खिलाफ आवाज उठाते नजर आए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप के फैसलों ने मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ाया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इससे महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि के साथ स्टैगफ्लेशन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

मिनेसोटा बना विरोध का केंद्र

अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में हजारों लोगों ने एकजुट होकर ट्रंप की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई बताया। आयोजकों के अनुसार, इससे पहले जून और अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों में क्रमशः 50 लाख और 70 लाख लोग शामिल हुए थे, जबकि इस बार भागीदारी और बढ़ने की उम्मीद जताई गई।

ब्रूस स्प्रिंग्सटीन की प्रस्तुति बनी आकर्षण

मशहूर गायक ब्रूस स्प्रिंग्सटीन ने सेंट पॉल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने गीत “Streets of Minneapolis” के जरिए पुलिस कार्रवाई और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई और प्रदर्शनकारियों के आंदोलन को उम्मीद की किरण बताया।

कई शहरों में प्रदर्शन

सैन डियागो में करीब 40,000 लोगों ने मार्च किया, जबकि वॉशिंगटन डीसी में लिंकन स्मारक से नेशनल मॉल तक रैली निकाली गई। लॉस एंजिल्स में स्थिति कुछ तनावपूर्ण हो गई, जहां पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। वहीं न्यूयॉर्क सिटी में नागरिक संगठनों ने सरकार पर लोगों को डराने का आरोप लगाया।

यूरोप में भी गूंजी आवाज

इन प्रदर्शनों की गूंज लंदन, रोम और पेरिस समेत कई यूरोपीय शहरों में भी सुनाई दी, जहां लोगों ने ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध के खिलाफ मार्च निकाले।

व्हाइट हाउस ने किया खारिज

व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को खारिज करते हुए कहा कि ये वामपंथी संगठनों द्वारा प्रायोजित हैं और आम जनता का इनसे ज्यादा संबंध नहीं है। वहीं रिपब्लिकन नेताओं ने भी इन रैलियों को अमेरिका विरोधी करार दिया।

कुल मिलाकर, ‘नो किंग्स’ आंदोलन ने न केवल अमेरिका बल्कि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और आने वाले समय में इसके और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।