17.6 C
New York
Tuesday, March 3, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Home news मिडिल ईस्ट संकट का असर उत्तराखंड पर, प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा को...

मिडिल ईस्ट संकट का असर उत्तराखंड पर, प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा को स्टेट हेल्प डेस्क सक्रिय

2

मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात का असर उत्तराखंड के उन हजारों परिवारों पर भी पड़ रहा है, जिनके सदस्य रोजगार, शिक्षा और अन्य कारणों से विदेशों में रह रहे हैं। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है और प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य स्तर पर एक विशेष हेल्प डेस्क सक्रिय की गई है, जिसके माध्यम से मिडिल ईस्ट में रह रहे उत्तराखंड के नागरिकों और उनके परिजनों को आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सरकार ने गृह विभाग और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से इजरायल, ईरान और आसपास के देशों में रह रहे नागरिकों का अद्यतन डेटाबेस तैयार करें। इसके साथ ही परिजनों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क स्थापित किया जा सके।

राज्य सरकार ने इस मामले में विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव स्तर पर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर वहां रह रहे नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय दूतावासों के साथ तालमेल बनाया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने प्रभावित परिवारों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

अनुमान के अनुसार उत्तराखंड के पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और देहरादून समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग इजरायल में कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि ईरान में भी कई पेशेवर और छात्र मौजूद हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए इन परिवारों में स्वाभाविक रूप से चिंता का माहौल है।

राज्य सरकार ने नागरिकों से केंद्र सरकार द्वारा जारी यात्रा एडवाइजरी का पालन करने और तनावग्रस्त क्षेत्रों की यात्रा से फिलहाल बचने की अपील की है। हेल्प डेस्क के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विदेशों में रह रहे लोगों का अपने परिजनों से संपर्क बना रहे और उन्हें समय पर आवश्यक सहायता मिलती रहे।