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Kisan Andolan: गुरनाम सिंह चढ़ूनी पर दर्ज हैं कितने आपराधिक मामले, 1979 में क्यों गए थे जेल ?

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गुरनाम सिंह चढ़ूनी पर दर्ज हैं
कितने आपराधिक मामले

गुरनाम सिंह चढ़ूनी पर दर्ज हैं कितने आपराधिक मामले हरियाणा में किसान आंदोलन से सुर्खियों में आए गुरनाम सिहं चढूनी के नेतृत्व में लाल किला हिंसा से लेकर, बीजेपी विधायकों, सीएम के विरोध में कई ऐसे वाक्ये हो चुके हैं, जिन्हें सामाजिक ही नहीं, कानूनी दृष्टी से भी आपराधिक तौर पर ही देखा जाता है।
लेकिन चढ़ूनी के लिए केस दर्ज होना कोई नई बात नहीं है,
वो कत्ल जैसी संगीन 307 धाराओं के तहत 5 साल जेल में भी काट चुके हैं।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी का आपराधिक सफर

किसान आंदोलन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रहने वाले हैं और उनके राजनीतिक कहें या आपराधिक कहें, दोनों का इतिहास भी यहीं से शुरु होता है। 1979 में गांव में हुए एक विवाद में गुरनाम सिंह चढ़ूनी पर कत्ल वाली संगीन धारा IPC 307 और क्रिमिनल कॉनस्पीरेसी की धारा 120 B के तहत मुकद्दमा दर्ज हुआ । लंबी कानूनी कार्यवाही के बाद एडिशनल सैशन जज ने उन्हें सात साल के कारवास की सजा सुनाई। इसी मुकद्दमे को लेकर जब गुरनाम सिहं चढ़ूनी के वकील क्रिमिनल अपील नंबर 1219 of 1979 को लेकर हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे
तो यहां भी हाईकोर्ट ने तमाम दलीलें सुनने के बाद 22 मई 1981 को 5 साल की सजा सुना दी।
और ये सजा घटकर 2 साल हो गई।
जाहिर है कि जुर्म इतना संगीन रहा होगा,
कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी को पांच साल की जेल की सजा पूरी करनी पड़ी।

 फिर हुई सजा

1981 में कुरुक्षेत्र की अदालत ने गुरनाम सिंह चढ़ूनी को संगीन धाराओं के जुर्म मं दो साल की सजा सुनाई गई
, जिसे बाद में सेशन अलाद ने घटाकर एक साल का कर दिया।

गुरनाम सिंह चढ़नी पर कितने केस ?

गुरनाम सिंह चढ़ूनी के आपराधिक कहें या राजनीतिक सफर में एक के बाद एक केस होते रहे,
साल 2022 में भी उन्हें 45 दिन की जेल की सजा हुई,
जिसमें अपील भी फाइल नहीं की गई।

ये सब जानकारियां  अपने 2019 में दिए गए चुनावी घोषणा पत्र में ही दर्ज हैं, इनके मुताबिक IPC की धारा 147 ,149, 341, 283,  188, 353, 186, 342 के तहत मुकद्दमे दर्ज 2019 से पहले से ही चल रह है। इन धाराओं और कानूनी सजाओं पर गौर करें तो गुरनाम सिंह चढ़ूनी पर कत्ल से लेकरे, सरकारी अधिकारियों के काम को रोकने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दंगा फैलाने जैसे संगीन जुर्म करने का आरोप है।

जिनमें से तीन मामलों में सजा भी हो चुकी है।

2020-21 में किसान आंदोलन में चढ़ूनी पर कितने नए केस ?

किसान आंदोलन शुरु होने के बाद चढ़ूनी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर अलग अलग जगहों पर प्रशासन और सरकार का विरोध करते रहे और कई बार विरोध इतना आक्रामक हुआ
कि सरकारी संपत्ति के नुकसान से लेकर सरकारी अधिकारियों को काम से रोकने,
विधायकों को काम से रोकने और तोड़फोड़ के दर्जनों मामले दर्ज हो चुके हैं।
शायद ये भी एक वजह है
कि भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी की ओर से हिसार से लेकर कई शहरों में प्रशासन से केस रद्द करवाने के लेकर धरना प्रदर्शन हुए हैं।