
भारतीय रक्षा उद्योग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी रूप से विकसित ‘पिनाका’ मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली खेप आर्मेनिया को सफलतापूर्वक निर्यात कर दी गई है। यह DRDO द्वारा डिज़ाइन किया गया हथियार अपने पहले विदेशी ऑर्डर के साथ ही भारत की रक्षा तकनीक की ताकत को दर्शाता है।
पिनाका की खासियत
पिनाका अपने समय में 12 रॉकेट केवल 44 सेकंड में दागने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के इलाके को पल भर में निशाना बनाया जा सकता है। इसकी मारक क्षमता 40 से 75 किलोमीटर तक है और यह कठिन भू-भाग में भी आसानी से तैनात किया जा सकता है। यही कारण है कि यह पर्वतीय क्षेत्रों जैसे आर्मेनिया के लिए आदर्श हथियार माना जाता है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
भारत और आर्मेनिया के बीच इस सौदे की कुल कीमत लगभग 2,000 करोड़ रुपये है, जिसमें पिनाका के साथ एंटी-टैंक मिसाइल और गोला-बारूद भी शामिल हैं। यह सौदा न केवल भारत को हथियारों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करता है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति में भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।
भारतीय रक्षा उद्योग का नया युग
पिनाका का विकास DRDO ने किया है, जबकि टाटा पावर और लार्सन एंड टुब्रो जैसी निजी कंपनियों ने इसके निर्माण में योगदान दिया। भारत सरकार ने 2025 तक रक्षा निर्यात को 35,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें पिनाका और ब्रह्मोस जैसे हथियार प्रमुख भूमिका निभाएंगे। पिनाका का सफल निर्यात न केवल भारत की सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की तकनीकी और सैन्य क्षमता का भी प्रतीक बन गया है।













