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Friday, January 16, 2026
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ग्लूकोमा आंखों की चुपचाप छीन लेने वाली खतरनाक बीमारी, आयुर्वेद से संभव है नियंत्रण

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आंखें, इंसान को मिली सबसे खूबसूरत और अनमोल नियामत हैं। इन्हीं के जरिए हम दुनिया की रंग-बिरंगी खूबसूरती को महसूस कर पाते हैं। लेकिन अगर आंखों की रोशनी धीरे-धीरे चली जाए, तो जीवन में अंधकार छा सकता है। एक ऐसी ही खतरनाक बीमारी है ग्लूकोमा, जो बिना शोर किए धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को निगल जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह बीमारी लक्षणों के बिना बढ़ती है और समय रहते इलाज न हो तो स्थायी अंधेपन का कारण बन सकती है।

क्या है ग्लूकोमा? जानिए इसके प्रकार

ग्लूकोमा आंखों की वह स्थिति है जिसमें आंख के अंदर दबाव (इन्ट्राऑक्युलर प्रेशर) बढ़ जाता है और ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे डैमेज होने लगती है। इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं—ओपन एंगल ग्लूकोमा और एंगल क्लोजर ग्लूकोमा। ओपन एंगल ग्लूकोमा सबसे आम है और लगभग 90% मामलों में यही देखने को मिलता है। इसमें लक्षण बहुत देर से नजर आते हैं। वहीं एंगल क्लोजर ग्लूकोमा कम लोगों को होता है लेकिन यह बहुत तेज़ और खतरनाक होता है। इसमें आंख के अंदर तरल पदार्थ तेजी से जमा होकर अचानक दबाव बढ़ा देता है।

ग्लूकोमा के लक्षण और खतरे

ओपन एंगल ग्लूकोमा में लक्षण बहुत देर से दिखते हैं, लेकिन एंगल क्लोजर ग्लूकोमा के लक्षण साफ तौर पर नजर आते हैं। इनमें शामिल हैं—तेज आंख दर्द, धुंधली दृष्टि, रोशनी के चारों ओर हल्के छल्ले दिखाई देना, सिर दर्द, मतली और उल्टी, आंखों का लाल होना, और कॉर्निया में सूजन। यह बीमारी धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को इतना नुकसान पहुंचाती है कि रोगी पूरी तरह से दृष्टिहीन हो सकता है।

क्या ग्लूकोमा का कोई इलाज है?

दुखद सच यह है कि ग्लूकोमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है। यह एक बार बढ़ना शुरू हो जाए तो आंखों की रोशनी को पूरी तरह से लौटाना संभव नहीं होता। लेकिन समय रहते इस बीमारी को पहचाना जाए तो इसका प्रबंधन किया जा सकता है जिससे आंखों की बची हुई रोशनी को बरकरार रखा जा सकता है।

ग्लूकोमा को ऐसे करें कंट्रोल

आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद भी आंखों की रक्षा में उपयोगी साबित हो सकता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में बदलाव से ग्लूकोमा को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. हेल्दी डाइट
    आयुर्वेद में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार पर जोर दिया गया है। इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, नट्स और बीज शामिल होने चाहिए। ये आंखों की सेहत को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  2. प्रभावशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

त्रिफला: आंखों की सफाई और रोशनी बढ़ाने में मददगार

ब्राह्मी: दृष्टि शक्ति बढ़ाती है और मस्तिष्क को भी लाभ देती है

गिंकगो बिलोबा: ऑप्टिक नर्व को पोषण देती है और ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है

आंवला: विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत जो आंखों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है

  1. आयुर्वेदिक व्यायाम और नस्य थेरेपी
    पल्मिंग एक्सरसाइज, आंखों को चारों दिशाओं में घुमाना, योग, प्राणायाम और ध्यान न केवल आंखों की थकान को कम करते हैं, बल्कि उन्हें ऊर्जावान बनाए रखते हैं। साथ ही, नस्य थेरेपी के जरिए आंखों में संतुलन लाकर ग्लूकोमा के जोखिम को कम किया जा सकता है।

ग्लूकोमा एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह आंखों की रोशनी पर वार करता है। इसलिए जरूरी है कि समय-समय पर आंखों की जांच कराई जाए और आंखों से जुड़ी छोटी सी भी तकलीफ को नजरअंदाज न किया जाए। आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के समन्वय से हम इस बीमारी को मात दे सकते हैं और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रख सकते हैं।