जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिवसीय भारत दौरे पर, पीएम मोदी से आज होगी अहम वार्ता

1

जर्मनी के नवनियुक्त चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंच गए हैं। हवाई अड्डे पर वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों और कूटनीतिज्ञों ने उनका औपचारिक स्वागत किया। चांसलर पद संभालने के बाद मर्ज की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बेहद अहम माना जा रहा है।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज के बीच हैदराबाद हाउस में उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

व्यापार और निवेश पर रहेगा फोकस

जर्मनी, यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इस यात्रा के दौरान आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को गति देने पर बातचीत हो सकती है। चांसलर मर्ज के साथ जर्मनी के शीर्ष उद्योगपतियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश के नए अवसरों की तलाश करेगा।

रक्षा और सामरिक सहयोग में विस्तार

भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को और गहराई देने पर भी चर्चा होगी। भारतीय नौसेना के लिए उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर बातचीत तेज होने की संभावना है। इसके साथ ही रक्षा और सामरिक क्षेत्रों में जर्मनी की उन्नत तकनीक के भारत में हस्तांतरण पर भी सहमति बन सकती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श होगा।

ग्रीन एनर्जी और कुशल श्रमिकों पर सहयोग

ग्रीन और सतत विकास साझेदारी के तहत भारत और जर्मनी ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर संयुक्त रोडमैप तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा भारत से कुशल पेशेवरों को जर्मनी में रोजगार के अवसर देने के लिए ‘मोबिलिटी पार्टनरशिप’ को और मजबूत करने पर सहमति बनने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संकट पर भी चर्चा होगी। भारत और जर्मनी वैश्विक शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान के समर्थक रहे हैं।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यह यात्रा जर्मनी की एशिया नीति में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी वार्ता से न केवल द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में यूरोप और एशिया के बीच रणनीतिक सहयोग को भी नई दिशा मिलेगी।