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Wednesday, January 21, 2026
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सेना के मेजर ने बनाया दुनिया का पहला बुलेटप्रूफ हेलमेट

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जम्मू-कश्मीर में लगातार सीमा पर भारतीय सेना के जवानों को पाकिस्तानी सेना अपनी गोलियों से निशाना बनती रहती है, साथ ही आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में सबसे बड़ी चिंता अपने सैनिकों की सुरक्षा की होती है। सेना की सुरक्षा के लिए मेजर अनूप मिश्रा ने बुलेटप्रूफ हेलमेट का निर्माण किया है। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया में पहला ऐसा बुलेटप्रूफ हेलमेट है जो 10 मीटर की दूरी से एके47 से चलाई गई गोली को रोक सकता है। इससे पहले अनूप मिश्रा ने बुलेट प्रूफ जैकेट का निर्माण किया था जो स्नाइपर राइफल की गोलियों से सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

सेना के अधिकारियों ने बताया कि बैलिस्टिक हेलमेट को मेजर अनूप मिश्रा द्वारा ‘अभेद प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत बनाया गया है। इसी के तहत फुल बॉडी प्रोटेक्शन बुलेटप्रूफ जैकेट भी विकसित किया गया है। अनूप मिश्रा भारतीय सेना के कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग के लिए काम करते हैं। मेजर अनूप मिश्रा जब वह जम्मू-कश्मीर में तैनात थे, उस दौरान एक ऑपरेशन में गोली का शिकार हुए थे। उस दौरान उन्होंने बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी थी,  इस वजह से गोली उनके शरीर को भेद तो नहीं सकी मगर उस गोली ने शरीर पर असर छोड़ दिया था।

ऐसे में उन्होंने नई बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने का फैसला किया। उनके द्वारा तैयार किया गया बुलेटप्रूफ जैकेट 10 मीटर से स्नाइपर बुलेट का सामना कर सकता है। इसके अलावा पुणे के मिलिट्री इंजीनियरिंग कॉलेज ने एक प्राइवेट फर्म के साथ मिलकर दुनिया का सबसे सस्ता गनशॉट लोकेटर भी विकसित किया है। यह 400 मीटर की दूरी से बुलेट के सटीक स्थान का पता लगा सकता है। यह आतंकवादियों का तेजी से पता लगाने और उन्हें बेअसर करने में मदद करेगा।

स्वदेशी सर्वत्र बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने पर तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने मेजर मिश्रा को आर्मी डिजाइन ब्यूरो एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया था। 2016-17 के दौरान रक्षा बजट से भारतीय सेना के लिए 50,000 बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदे गए थे। जुलाई 2018 में तत्कालीन रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने एक लिखित जवाब में बताया था कि कुल 1,86,138 बुलेट प्रूफ जैकेट का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया था। इसके साथ ही दिसंबर 2016 में 1,58,279 बैलिस्टिक हेलमेट की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया था।

पुणे की कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग (सीएमई), एक प्रमुख सामरिक और तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान कोर ऑफ इंजीनियर्स की मातृ संस्था है। सीएमई कॉम्बैट इंजीनियरिंग, सीबीआरएन प्रोटेक्शन, वर्क्स सर्विसेज और जीआईएस मामलों में सभी शस्त्र और सेवाओं के कर्मियों को निर्देश देने के अलावा इंजीनियरों के कोर कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए भी जिम्मेदार है