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Friday, January 30, 2026
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आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक छलांग, भारतीय सेना का 90% गोला-बारूद अब पूरी तरह स्वदेशी

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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गोला-बारूद का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अब देश में ही डिजाइन और विकसित किया जा रहा है। इस कदम ने न सिर्फ विदेशी देशों पर भारत की दशकों पुरानी निर्भरता को खत्म किया है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को एक उभरते हुए डिफेंस हब के रूप में भी स्थापित किया है।

रणनीतिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी युद्ध में जीत केवल आधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि गोला-बारूद की निरंतर और भरोसेमंद आपूर्ति से तय होती है। अब तक भारत को कई अहम गोला-बारूद के लिए रूस, इजरायल और यूरोपीय देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे संकट या युद्ध की स्थिति में आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता था। 90 प्रतिशत स्वदेशीकरण के बाद भारतीय सेना अब लंबी अवधि के किसी भी संघर्ष के लिए आत्मनिर्भर और पूरी तरह तैयार मानी जा रही है।

छोटे हथियारों से लेकर मिसाइल सिस्टम तक स्वदेशी ताकत

इस स्वदेशीकरण अभियान के दायरे में

  • छोटे हथियारों की गोलियां,
  • टैंक और आर्टिलरी गन के गोले,
  • मल्टी-कैलिबर एम्युनिशन,
  • एंटी-टैंक और अन्य मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय की ‘सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची’ (Positive Indigenisation Lists) के तहत सैकड़ों रक्षा उपकरणों और गोला-बारूद के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहे हैं।

निजी क्षेत्र और DPSUs की अहम भूमिका

इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) के साथ-साथ निजी कंपनियों और MSME सेक्टर ने भी अहम भूमिका निभाई है। सरकार की नीति समर्थन और समयबद्ध फैसलों के चलते इन कंपनियों ने रिकॉर्ड समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाई, जिससे सेना की आवश्यकताओं की आपूर्ति देश के भीतर ही संभव हो पाई।

रक्षा निर्यात और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

स्वदेशी गोला-बारूद उत्पादन से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो रही है, भारत अब रक्षा उत्पादों का निर्यातक देश बनकर उभर रहा है, कई मित्र देशों ने भारत में बने गोला-बारूद में रुचि दिखाई है। इसके साथ ही इस पूरे अभियान से हजारों कुशल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और देश का MSME सेक्टर मजबूत हुआ है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि भारत को केवल सैन्य रूप से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक, औद्योगिक और कूटनीतिक रूप से भी सशक्त बनाती है। स्वदेशी गोला-बारूद के साथ भारत अब युद्ध की तैयारी में आत्मनिर्भर, और वैश्विक रक्षा बाजार में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है।